ज्येष्ठ सोमवती अमावस्या पर लाखों श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में लगाई डुबकी, कामदगिरि परिक्रमा के लिए उमड़ा जनसैलाब
4:37 PM, Jun 15, 2026
R Express भारत
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सनातन धर्म की प्रमुख आस्था के केंद्रों में से एक, पावन धर्मनगरी चित्रकूट में ज्येष्ठ मास की सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर श्रद्धा, विश्वास और भक्ति का अभ

धर्मनगरी चित्रकूट में आस्था का महासंगम सौ0 RExpress भारत
चित्रकूट। सनातन धर्म की प्रमुख आस्था के केंद्रों में से एक, पावन धर्मनगरी चित्रकूट में ज्येष्ठ मास की सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर श्रद्धा, विश्वास और भक्ति का अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला। कड़कड़ाती धूप और गर्मी की परवाह किए बिना देश के कोने-कोने से आए लाखों श्रद्धालुओं ने भगवान कामतानाथ के दर पर हाजिरी लगाई। भोर की पहली किरण के साथ ही पवित्र मंदाकिनी नदी के घाट जयकारों से गूंज उठे। लाखों भक्तों ने मंदाकिनी गंगा में डुबकी लगाकर अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण किया और भगवान कामतानाथ स्वामी की पांच कोसीय परिक्रमा कर सुख-समृद्धि की कामना की।
भोर की पहली किरण से ही रामघाट पर पैर रखने की जगह नहीं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवती अमावस्या के दिन चित्रकूट में निवास करने वाले देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी आस्था के साथ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों से श्रद्धालु एक दिन पहले ही चित्रकूट पहुंचने लगे थे। सोमवार सुबह तड़के 3 बजे से ही रामघाट, राघव प्रयाग घाट और सती अनुसूया आश्रम के समीप मंदाकिनी नदी के घाटों पर श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा।घाटों पर तिल रखने की भी जगह नहीं थी। श्रद्धालुओं ने पारंपरिक वैदिक मंत्रोच्चार के बीच स्नान किया, जिसके बाद घाटों पर बैठे पुरोहितों से विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना और दान-पुण्य करवाया। इसके साथ ही पीपल के वृक्ष की परिक्रमा कर महिलाओं ने अखंड सौभाग्य की कामना की।
जय श्रीराम और 'कामतानाथ महाराज की जय' से गुंजायमान हुई धर्मनगरी
स्नान के पश्चात श्रद्धालुओं का विशाल समूह भगवान कामतानाथ स्वामी के दर्शन के लिए उमड़ पड़ा। कामदगिरि पर्वत की पांच किलोमीटर लंबी परिक्रमा मार्ग पर भक्तों की अटूट कतारें देखी गईं। बच्चे, बूढ़े, महिलाएं और नौजवान सभी नंगे पैर कामतानाथ महाराज के जयघोष करते हुए आगे बढ़ रहे थे।पूरा परिक्रमा मार्ग "जय श्रीराम", "कामतानाथ महाराज की जय" और "हर हर महादेव" के गूंजते हुए नारों से भक्तिमय हो गया। कई श्रद्धालु जमीन पर लेटकर परिक्रमा लगाते हुए नजर आए, जो उनकी अगाध श्रद्धा को प्रदर्शित कर रहा था। मुख्य मंदिर में भगवान कामतानाथ के विशेष श्रृंगार के दर्शन के लिए भक्तों को घंटों इंतजार करना पड़ा, लेकिन चेहरे पर थकान की जगह भक्ति का उत्साह साफ दिखाई दे रहा था।
लाखों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए सतना पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहा। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए पूरे मेला क्षेत्र को विभिन्न जोन और सेक्टरों में विभाजित किया गया था।मंदाकिनी नदी के गहरे पानी वाले क्षेत्रों में बैरिकेडिंग की गई थी। इसके साथ ही जल पुलिस और गोताखोरों की टीमों को नावों के साथ तैनात किया गया था ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटा जा सके।मुख्य चौराहों, रामघाट, परिक्रमा मार्ग और कामतानाथ मंदिर परिसर में स्थापित कंट्रोल रूम से सीसीटीवी कैमरों के जरिए भीड़ की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही थी। चित्रकूट में वाहनों के अत्यधिक दबाव को रोकने के लिए शहर के बाहरी हिस्सों में ही बड़े वाहनों को रोककर अस्थायी पार्किंग बनाई गई थी। मुख्य मेला क्षेत्र में भारी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहा, जिससे श्रद्धालुओं को पैदल चलने में कोई असुविधा नहीं हुई।
स्थानीय व्यापार और पर्यटन को मिला भारी बूस्ट
इस पावन पर्व के कारण चित्रकूट के स्थानीय बाजारों में भी भारी रौनक देखने को मिली। होटल्स, धर्मशालाएं, लॉज और गेस्ट हाउस कई दिन पहले से ही पूरी तरह बुक थे। रामघाट और परिक्रमा मार्ग पर स्थित प्रसाद, फूल-माला, धार्मिक पुस्तकों और हस्तशिल्प की दुकानों पर खरीदारों की भारी भीड़ रही। स्थानीय दुकानदारों और छोटे व्यापारियों के चेहरे खिले नजर आए। जानकारों के मुताबिक, इस एक दिवसीय मेले से स्थानीय अर्थव्यवस्था को करोड़ों रुपये का कारोबार मिला है, जिससे छोटे मनिहारी और हस्तशिल्प व्यापारियों को बड़ा संबल मिला है।
सेवा और सामाजिक संस्थाओं ने बढ़ाया मदद का हाथ
चिलचिलाती धूप और उमस को देखते हुए चित्रकूट की विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी सराहनीय कार्य किया। परिक्रमा मार्ग और प्रमुख चौराहों पर श्रद्धालुओं के लिए ठंडे पानी, शरबत, शिकंजी और छाछ के स्टॉल लगाए गए थे। कई स्थानों पर भंडारे का आयोजन कर भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया। चिकित्सा विभाग की ओर से भी मेला क्षेत्र में जगह-जगह अस्थायी मेडिकल कैंप लगाए गए थे, जहां धूप और थकान के कारण अस्वस्थ महसूस करने वाले श्रद्धालुओं को त्वरित प्राथमिक उपचार दिया जा रहा था।
धार्मिक महत्व: क्यों खास है सोमवती अमावस्या?
पौराणिक कथाओं और हिंदू शास्त्रों के अनुसार, सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व होता है, विशेषकर जब यह ज्येष्ठ मास में पड़ती है। माना जाता है कि भगवान राम ने अपने वनवास काल के साढ़े ग्यारह वर्ष चित्रकूट के इन्हीं जंगलों और कामदगिरि पर्वत पर व्यतीत किए थे। मान्यता है कि इस दिन मंदाकिनी में स्नान करने और कामतानाथ स्वामी की परिक्रमा करने से मनुष्य के जनम-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं और पितरों की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इस विशेष तिथि पर चित्रकूट में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ता है।शाम ढलते-ढलते रामघाट पर मंदाकिनी गंगा की भव्य आरती का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों दीपों की रोशनी से नदी का पानी जगमगा उठा। इस अलौकिक दृश्य को अपनी आंखों और कैमरों में कैद कर श्रद्धालु एक असीम शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना होने लगे।

