बीकेटी में चंद्रिका देवी मोड़ पर रेंगती जिंदगी, भीषण जाम से जनता बेहाल
7:02 PM, May 30, 2026
R Express भारत
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ग्रामीण और उपनगरीय क्षेत्रों में यातायात प्रबंधन की पोल खोलने वाली एक बड़ी समस्या हर दिन बख्शी का तालाब के पास स्थित चंद्रिका देवी मोड़ पर देखने को मिल रही

बीकेटी में चंद्रिका देवी मोड़ पर रेंगती जिंदगी सौ0 RExpress भारत
लखनऊ। ग्रामीण और उपनगरीय क्षेत्रों में यातायात प्रबंधन की पोल खोलने वाली एक बड़ी समस्या हर दिन बख्शी का तालाब के पास स्थित चंद्रिका देवी मोड़ पर देखने को मिल रही है। प्रसिद्ध माँ चंद्रिका देवी मंदिर की ओर जाने वाले इस मुख्य चौराहे और सीतापुर रोड के इस हिस्से पर गाड़ियों की लंबी कतारें अब आम जनजीवन के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुकी हैं। हर रोज लगने वाले इस भीषण जाम की वजह से न सिर्फ स्थानीय दुकानदार और राहगीर परेशान हैं, बल्कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु और गंभीर मरीज भी घंटों फंसे रहने को मजबूर हैं।
स्थानीय स्थिति और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस चौराहे पर जाम लगने का कोई एक कारण नहीं है। हाईवे के किनारे बड़ी सार्वजनिक बसों (जैसे लखनऊ इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल की बसें) का बेतरतीब रुकना, ई-रिक्शा और ऑटो चालकों द्वारा सवारियां बैठाने के लिए बीच सड़क पर गाड़ियां खड़ी कर देना इस समस्या को और गंभीर बना देता है। इसके अलावा, सड़क के दोनों ओर दुकानदारों द्वारा किए गए अवैध अतिक्रमण और फुटपाथों पर वाहनों की अवैध पार्किंग के चलते चौड़ी सड़क भी सिकुड़ कर आधी रह गई है। जब सीतापुर हाईवे का तेज यातायात इस मोड़ से गुजरता है, तो वाहनों की आपस में उलझन पूरी तरह से चक्काजाम का रूप ले लेती है।
इस मार्ग पर सुबह और शाम के समय स्थिति सबसे ज्यादा भयावह हो जाती है। दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, स्कूल-कॉलेज के छात्र और आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहन रेंग-रेंग कर चलने को मजबूर हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस गंभीर जाम में अक्सर एम्बुलेंस और दमकल जैसी आपातकालीन गाड़ियां भी फंसी रहती हैं, जिससे किसी अनहोनी का खतरा हमेशा मंडराता रहता है।क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि, पुलिस और यातायात विभाग द्वारा समय-समय पर की जाने वाली कार्रवाई महज औपचारिकता बनकर रह गई है। जब तक चौराहे पर यातायात पुलिस के जवान मुस्तैद नहीं होते, तब तक वाहन चालक नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाते हैं।
जनता की मांग है कि,चंद्रिका देवी मोड़ और बीकेटी अस्पताल के सामने पक्के नो-पार्किंग जोन बनाए जाएं।ऑटो और ई-रिक्शा के लिए अलग से पिक-एंड-ड्रॉप प्वाइंट निर्धारित हों।व्यस्त घंटों के दौरान यहां स्थायी रूप से भारी ट्रैफिक पुलिस बल तैनात किया जाए।

