MP के किसानों के लिए लॉटरी: 4000 करोड़ का खर्च उठाएगी सरकार, मुफ़्त होगी रजिस्ट्री
6:44 PM, Oct 5, 2026
R Express भारत
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मध्य प्रदेश के किसानों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रीवा में चल रहे 'बलरा

sketch by - ( AI )
मध्य प्रदेश के किसानों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रीवा में चल रहे 'बलराम कृषि महोत्सव' में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के किसानों और जमीन के पट्टाधारकों के हक में एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिससे लाखों परिवारों की बरसों पुरानी चिंता चुटकियों में दूर हो जाएगी।
बिना एक भी रुपया खर्च किए मिलेगी जमीन की रजिस्ट्री
इस महोत्सव में मुख्यमंत्री ने एलान किया कि मध्य प्रदेश में जितने भी किसानों या लोगों के पास जमीन के पट्टे तो हैं, लेकिन पैसों या किसी अन्य वजह से उनकी रजिस्ट्री नहीं हो पाई है, उन सभी की रजिस्ट्री अब राज्य सरकार खुद कराएगी। सबसे खास बात यह है कि इसके लिए किसानों को अपनी जेब से एक भी रुपया नहीं देना होगा। पूरे प्रदेश में ऐसे करीब 50 लाख पट्टाधारक हैं, जिनकी रजिस्ट्री का 4,000 करोड़ रुपये का पूरा खर्च अब मध्य प्रदेश सरकार अपनी जेब से भरेगी। सरकार इस कदम से सीधे तौर पर उन गरीब और मध्यमवर्गीय किसानों को मालिकाना हक देना चाहती है जो सालों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे।
रीवा के खेतों तक पहुँचेगा नर्मदा का पानी
जमीन की रजिस्ट्री के अलावा मुख्यमंत्री ने रीवा और आसपास के इलाके के किसानों को पानी की समस्या से निजात दिलाने का भी पक्का भरोसा दिया। उन्होंने बताया कि स्लीमनाबाद टनल का काम अब आखिरी चरण में है और बहुत जल्द यह बनकर तैयार हो जाएगी। इस टनल के चालू होते ही नर्मदा नदी का पानी सीधे रीवा के खेतों तक पहुँचने लगेगा। इसके साथ ही त्योंथर, लोंही, सिरमौर और सेमरिया के इलाकों में चल रहे पानी के प्रोजेक्ट्स जैसे ही पूरे होंगे, वैसे ही करीब 1.32 लाख हेक्टेयर सूखी जमीन पूरी तरह हरी-भरी हो जाएगी।
कमाई बढ़ाने के लिए अपनानी होगी नई तकनीक
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद किसानों से सीधा संवाद करते हुए कहा कि अब पारंपरिक ढर्रे से हटकर खेती करने का समय आ गया है। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी और बताया कि रीवा में 1,000 हेक्टेयर की जमीन पर खास तौर से बिना केमिकल वाली खेती का हब बनाया जा रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे खेती के साथ-साथ पशुपालन को अपनाएं और आधुनिक कृषि उपकरणों का इस्तेमाल करें ताकि उनकी लागत कम हो और मुनाफा दोगुना हो सके। सरकार इस साल को 'किसान कल्याण वर्ष' के रूप में मना रही है, जिसके तहत राज्य के सभी 55 जिलों में ऐसे आयोजन करके किसानों को सीधे तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है।

