LU का बड़ा धमाका: LLB छात्रों की बल्ले-बल्ले! अब थ्योरी-इंटरनल में अलग से पास होना जरूरी नहीं, बदला नियम
3:11 PM, Jun 1, 2026
R Express भारत
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विधि शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित लखनऊ विश्वविद्यालय ने एक बेहद क्रांतिकारी और छात्र हितैषी कदम उठाया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने राष्

लखनऊ विश्वविद्यालय का ऐतिहासिक फैसला फोटो — RExpress भारत
लखनऊ।विधि शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित लखनऊ विश्वविद्यालय ने एक बेहद क्रांतिकारी और छात्र हितैषी कदम उठाया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सिद्धांतों को अंगीकार करते हुए अपने एल-एल.बी. (3 वर्षीय और 5 वर्षीय) पाठ्यक्रमों में इसे लागू करने का बड़ा निर्णय लिया है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब कानून की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को परीक्षा पास करने के लिए पुराने और कठिन नियमों से बड़ी राहत मिल गई है।विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह नया नियम केवल आगामी सत्रों के लिए ही नहीं, बल्कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र के द्वितीय सेमेस्टर में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं पर भी तत्काल प्रभाव से लागू माना जाएगा।

शिक्षा विभाग के खिलाफ छात्रों का विरोध सौ0 RExpress भारत
पासिंग मार्क्स का बदला फॉर्मूला, छात्रों को मिली बड़ी राहत
अब तक विधि के विद्यार्थियों को थ्योरी (लिखित परीक्षा) और इंटरनल असेसमेंट (आंतरिक मूल्यांकन) दोनों में अलग-अलग न्यूनतम अंक लाकर पास होना अनिवार्य होता था। कई बार छात्र लिखित परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद आंतरिक मूल्यांकन में एक या दो नंबर से चूक जाने के कारण अनुत्तीर्ण हो जाते थे।इस विसंगति को दूर करते हुए विश्वविद्यालय ने अब 'कंबाइंड पासिंग सिस्टम' को हरी झंडी दे दी है। नए नियमों के तहत छात्रों को अब लिखित परीक्षा और इंटरनल दोनों को मिलाकर कुल 40 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे। यदि दोनों का योग 40 फीसदी तक पहुंच जाता है, तो छात्र को उस विषय में उत्तीर्ण घोषित कर दिया जाएगा। हालांकि, इसके साथ एक अनिवार्य शर्त यह भी जोड़ी गई है कि विद्यार्थी को पूरे सेमेस्टर के सभी विषयों को मिलाकर न्यूनतम 45 प्रतिशत कुल अंक प्राप्त करने होंगे।

भारी संख्या पर छात्र प्रदर्शन की तैयारी करते हुए सौ0 RExpress भारत
परीक्षा और मूल्यांकन के बदले नियम
इस ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव के साथ ही विश्वविद्यालय ने अंक विभाजन के ढांचे को भी नया रूप दिया है। अब कुल मूल्यांकन में 75 प्रतिशत हिस्सेदारी मुख्य लिखित परीक्षा की होगी, जबकि शेष 25 प्रतिशत अंक इंटरनल असेसमेंट के लिए निर्धारित किए गए हैं। इस संतुलित व्यवस्था से छात्रों को अपनी तैयारी को बेहतर दिशा देने में मदद मिलेगी।यही नहीं, प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि इस नई व्यवस्था के आधार पर प्रथम सेमेस्टर के परिणाम को भी अपडेट किया जाएगा। इसके लिए बहुत जल्द ही संशोधित मार्कशीट जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी, जिससे छात्र अपने सुधरे हुए प्राप्तांक देख सकेंगे।

जुगल किशोर पांडे आवाज उठाते हुए सौ0 RExpress भारत
क्यों खास है यह निर्णय?
विशेषज्ञों और विवि के अधिकारियों का मानना है कि, इस कदम से न केवल छात्रों का मानसिक तनाव कम होगा, बल्कि विषम से सम सेमेस्टर में छात्रों के प्रोन्नत होने की राह भी आसान हो जाएगी। बैक पेपर और फेल होने वाले विद्यार्थियों की संख्या में कमी आने से विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कैलेंडर को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। लखनऊ विश्वविद्यालय का यह कदम प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों के लिए भी विधि शिक्षा के सरलीकरण का एक बेहतरीन मॉडल साबित हो सकता है। प्रशासन से मांग करते दौरान मामला गंभीर सौ0

प्रशासन से मांग करते दौरान मामला गंभीर सौ0 RExpress भारत
बताया जा रहा है कि, जिन छात्रो के द्वारा परीक्षा में सच में कोई भी सही उत्तर नही दिया गया था और उन्होंने मेहनत नही की थी। जिसकी वजह से रिजल्ट खराब हुआ था। उनके रिजल्ट में सुधार नही किया जाएगा और उन्हे दोबारा मेहनत करके बैक पेपर देना होगा। फिर उसमें पास होना होगा। रिजल्ट उन्हीं छात्रों का सही किया जाएगा । जिन्होंने पढ़ाई करके अपने परीक्षा मेे लिखा था और उनकी कॉपी चेंकिग सही से नही हो पाई थी। जिसकी वजह से उनका परिणाम उनके हक में नही आया था। उनको इस फैसला लाभ मिलेगा और उनका रिजल्ट सही किया जा रहा है।

