लखनऊ विश्वविद्यालय: परीक्षा परिणाम से असंतुष्ट छात्रों ने खोला मोर्चा, गेट नंबर 1 पर जुटेंगे छात्र
10:56 PM, May 31, 2026
R Express भारत
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लखनऊ विश्वविद्यालय के परीक्षा परिणामों को लेकर छात्रों के बीच असंतोष गहराता जा रहा है। रिजल्ट में विसंगतियों और अप्रत्याशित रूप से बैक आने से परेशान छात्र

रिजल्ट में गड़बड़ी को लेकर प्रदर्शन सांकेतिक सौ 0 RExpress भारत
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के परीक्षा परिणामों को लेकर छात्रों के बीच असंतोष गहराता जा रहा है। रिजल्ट में विसंगतियों और अप्रत्याशित रूप से बैक आने से परेशान छात्रों ने अब सामूहिक रूप से आवाज उठाने का फैसला किया है। इसी सिलसिले में 1 जून को विश्वविद्यालय परिसर के गेट संख्या 1 पर एक बड़े विरोध और विचार-विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। दोपहर 1:00 बजे होने वाले इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पीड़ित छात्रों के जुटने की संभावना है।
नाराज छात्रों का आरोप: कॉपियों के मूल्यांकन में हुई लापरवाही
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे छात्र प्रतिनिधियों का आरोप है कि इस बार विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कॉपियों के मूल्यांकन में भारी लापरवाही बरती गई है। कई ऐसे छात्र जो पढ़ाई में बेहतर हैं और जिन्हें पास होने का पूरा भरोसा था, उन्हें भी फेल कर दिया गया है। इसके अलावा, कई छात्र ऐसे भी हैं जिनका पिछली सेमेस्टर परीक्षाओं की तुलना में इस बार कहीं अधिक विषयों में बैक दिखा रहा है। छात्रों का कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन या डेटा फीडिंग में तकनीकी गड़बड़ी के कारण उनका भविष्य दांव पर लग गया है।
रिजल्ट की हार्डकॉपी के साथ सरस्वती प्रतिमा पर जुटेंगे छात्र
यूनिवर्सिटी कैंपस के गेट संख्या 1 पर स्थित सरस्वती प्रतिमा के पास होने वाले इस एकत्रीकरण के लिए छात्रों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। सभी प्रभावित छात्रों से कहा गया है कि वे अपने साथ परीक्षा परिणाम की इंटरनेट से निकली हुई हार्डकॉपी (प्रिंटआउट) जरूर लाएं, ताकि विसंगतियों का एक पुख्ता डेटा तैयार कर विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपा जा सके।
केवल 'जेन्युइन' छात्रों को ही आने की अपील
इस आंदोलन की सबसे खास बात यह है कि आयोजकों ने केवल उन्हीं छात्रों को आमंत्रित किया है जिनके साथ वास्तव में अन्याय हुआ है। सोशल मीडिया पर प्रसारित संदेशों में साफ कहा गया है कि जो छात्र अपनी लापरवाही या पढ़ाई न करने की वजह से फेल हुए हैं, वे इस भीड़ का हिस्सा न बनें। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि प्रदर्शन की गंभीरता बनी रहे और विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने केवल वास्तविक और प्रामाणिक मामले ही रखे जा सकें।
विश्वविद्यालय प्रशासन से स्क्रूटनी की मांग
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय के कुलपति और परीक्षा नियंत्रक को एक ज्ञापन सौंपना है। छात्र मांग करेंगे कि , जिन उत्तर पुस्तिकाओं पर संदेह है, उन्हें दोबारा निकाला जाए और पूरी पारदर्शिता के साथ री-चेकिंग (स्क्रूटनी) कराई जाए। छात्रों का कहना है कि, यदि प्रशासन ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो वे अपने करियर को बचाने के लिए बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

