होर्मुज में भारतीय तेल टैंकर पर चुंबकीय बम से हमला; 27 नाविक सुरक्षित
1:14 PM, Nov 1, 2026
R Express भारत
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अंतरराष्ट्रीय व्यापार के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर भयंकर बारूद बरसा है। इस बार निशाना बना है पनामा के झंडे व

photo by - ( AI )
अंतरराष्ट्रीय व्यापार के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर भयंकर बारूद बरसा है। इस बार निशाना बना है पनामा के झंडे वाला एक विशाल कच्चा तेल ले जाने वाला टैंकर, जिसका नाम 'एमटी लुईस 1'है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस कमर्शियल जहाज पर कुल 27 क्रू मेंबर्स सवार थे और ये सभी के सभी भारतीय नागरिक हैं।
छोटी नाव से आए हमलावर, ऐसे दिया वारदात को अंजाम
अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह घटना ओमान के खासब इलाके से करीब 46 किलोमीटर दूर उत्तर-पूर्व समुद्र में हुई। हमला बेहद शातिराना और नए तरीके से किया गया। एक छोटी नाव बहुत तेजी से तेल टैंकर के करीब आई। नाव पर सवार हमलावरों ने जहाज के निचले हिस्से पर दो बेहद खतरनाक लिम्पेट माइन, जिन्हें आम भाषा में 'चिपकने वाले चुंबकीय बम' कहा जाता है, चिपका दिए और वहां से रफूचक्कर हो गए। इसके कुछ ही देर बाद जहाज में दो जोरदार धमाके हुए।
इंजन रूम में लगी भीषण आग, भारतीयों ने दिखाई बहादुरी
इन धमाकों की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि तेल टैंकर के सीधे इंजन रूम में भयंकर आग लग गई। आग की लपटें देखकर एक पल के लिए जहाज पूरी तरह से समुद्र के बीच में ही थम गया। ऐसी आपातकालीन स्थिति में जहाज पर मौजूद सभी 27 भारतीय जांबाजों ने गजब की सूझबूझ और बहादुरी दिखाई। उन्होंने बिना वक्त गंवाए आधुनिक फायर फाइटिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया और अपनी जान पर खेलकर इंजन रूम में लगी उस भीषण आग को पूरी तरह काबू में कर लिया। राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि सभी भारतीय पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी को खरोंच तक नहीं आई। समुद्र में तेल फैलने या पर्यावरण को नुकसान होने की भी कोई खबर नहीं है।
ग्लोबल मार्केट में बढ़ा तनाव, तेल की कीमतों पर असर का डर
क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भारी तनाव के बीच इस तरह चुंबकीय बम का इस्तेमाल पहली बार देखा गया है, जिसने सुरक्षा एक्सपर्ट्स की नींद उड़ा दी है। इस रूट से दुनिया का एक-तिहाई कच्चा तेल गुजरता है। इस ताजा हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापारिक रूटों पर डर का माहौल है, जिससे आने वाले दिनों में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने और वैश्विक बाजार में डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ने का खतरा काफी ज्यादा बढ़ गया है।
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