महाकाल से अयोध्या: दिग्विजय सिंह की सनातन यात्रा शुरू
3:22 PM, Oct 20, 2026
R Express भारत
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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने आज विजयादशमी के पावन मौके पर बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से अपनी बहुचर्चित 'सत्

photo by - ( chat GPT )
उज्जैन। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने आज विजयादशमी के पावन मौके पर बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से अपनी बहुचर्चित 'सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा' की शुरुआत कर दी है। पूरी तरह धार्मिक और आध्यात्मिक बताई जा रही यह पदयात्रा उज्जैन से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के अयोध्या में नवनिर्मित श्रीराम मंदिर तक जाएगी। यात्रा के रवाना होते ही सियासी और धार्मिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
पांच पवित्र नदियों के जल से सजी है यात्रा
इस यात्रा का मुख्य आकर्षण इसके साथ चल रहा विशेष 'धर्म रथ' है। इस रथ में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण जी और संकटमोचन हनुमान जी की बेहद खूबसूरत और पवित्र तस्वीरें स्थापित की गई हैं। धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हुए इस रथ में देश की पांच सबसे प्रमुख और पवित्र नदियों— गंगा, यमुना, शिप्रा, कावेरी और नर्मदा का जल कलशों में भरकर ले जाया जा रहा है। अयोध्या पहुंचने पर इस पवित्र जल से श्रीराम लला का जलाभिषेक किया जाएगा।
70 दिन में पूरी होगी 950 किलोमीटर की दूरी
दिग्विजय सिंह की यह पदयात्रा लगभग 950 किलोमीटर लंबी है, जिसे करीब 70 दिनों में पूरा करने का संकल्प लिया गया है। शेड्यूल के मुताबिक, यात्रा में शामिल श्रद्धालु हर दिन लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करेंगे। यह यात्रा उज्जैन के महाकाल मंदिर से शुरू होकर तराना, शाजापुर, सारंगपुर, राजगढ़, चाचौड़ा, अशोकनगर, चंदेरी और ओड़छा के प्रसिद्ध राम राजा सरकार मंदिर से होते हुए कानपुर और लखनऊ के रास्ते अयोध्या पहुंचेगी।
सनातन के संदेश के साथ व्यवस्थाओं पर सवाल
यात्रा शुरू करने से पहले दिग्विजय सिंह ने उज्जैन के प्रसिद्ध चिंतामन गणेश और महाकालेश्वर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। यात्रा के उद्देश्यों को लेकर उन्होंने साफ किया कि इसका मकसद सनातन धर्म के असली मूल्यों जैसे सत्य, दया और समरसता को समाज में फैलाना है। हालांकि, इस धार्मिक यात्रा के जरिए वे मंदिरों के चढ़ावे में पारदर्शिता और धार्मिक स्थलों के प्रशासनिक रखरखाव जैसे गंभीर मुद्दों पर भी अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। संतों और स्थानीय लोगों के भारी समर्थन के साथ शुरू हुई यह यात्रा आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का केंद्र बनी रहेगी।

