ममता बनर्जी का बड़ा दांव: सिंबल छिनने के बाद नंदीग्राम में कांग्रेस को सपोर्ट
1:27 PM, Sep 22, 2026
R Express भारत
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तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके मशहूर 'जोड़ा घास फूल' सिंबल पर चुनाव आयोग की रोक के बाद बंगाल की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस बड़े संकट के बीच ममता बनर्ज

sketch by - ( AI )
उत्तर प्रदेश। तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके मशहूर 'जोड़ा घास फूल' सिंबल पर चुनाव आयोग की रोक के बाद बंगाल की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस बड़े संकट के बीच ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जहाँ अदालत इस मामले पर तुरंत सुनवाई करने के लिए राजी हो गई है। दूसरी तरफ, जमीनी मोर्चे पर ममता बनर्जी ने एक बड़ा दांव खेलते हुए नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस कैंडिडेट को अपना समर्थन देने का इशारा किया है।
चुनाव आयोग की कार्रवाई और नए सिंबल
ममता बनर्जी और अरूप रॉय के गुटों के बीच चल रही अंदरूनी लड़ाई की वजह से चुनाव आयोग ने यह कड़ा कदम उठाया है। आयोग ने विवाद के सुलझने तक दोनों ही गुटों के मूल नाम और पारंपरिक निशान के इस्तेमाल पर ब्रेक लगा दिया है। आने वाले उपचुनावों को देखते हुए आयोग ने दोनों धड़ों को नए नाम और सिंबल दिए हैं। ममता बनर्जी के गुट को अब 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' निशान मिला है। वहीं, विरोधी अरूप रॉय के गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम के साथ 'लिफाफा' सिंबल अलॉट किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट से राहत की उम्मीद
इस फैसले के खिलाफ ममता बनर्जी ने देश की सबसे बड़ी अदालत का दरवाजा खटखटाया है। सोमवार, 21 सितंबर 2026 को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच के सामने जब वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने इस मामले को रखा, तो कोर्ट ने इसकी गंभीरता को देखते हुए फौरन सुनवाई करने की मंजूरी दे दी। ममता गुट को उम्मीद है कि अदालत से उन्हें अपने पुराने नाम और सिंबल पर दोबारा हक मिल जाएगा।
नंदीग्राम में ममता का बड़ा सियासी दांव
इस अदालती और प्रशासनिक लड़ाई के बीच नंदीग्राम के सियासी मैदान से एक चौंकाने वाली खबर आई है। नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में ममता बनर्जी के गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान ने अचानक अपना पर्चा वापस ले लिया है। इस अप्रत्याशित कदम के तुरंत बाद ममता बनर्जी ने बड़ा दिल दिखाते हुए नंदीग्राम सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार को सपोर्ट करने का मन बना लिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि, ममता बनर्जी का यह कदम बीजेपी और विरोधी गुट को पटखनी देने के लिए एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। इस फैसले से बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं।

