मायावती का बड़ा ऐक्शन: ससुर के संन्यास के बाद भतीजे आकाश आनंद को भी पार्टी से निकाला, मचा हड़कंप!
6:42 PM, Sep 10, 2026
R Express भारत
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बहुजन समाज पार्टी के भीतर छिड़ी पारिवारिक और राजनीतिक जंग अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। पार्टी मुखिया मायावती ने एक बहुत बड़ा फैसला लेते हुए अपने भतीजे

photo by - ( chat GPT)
उत्तर प्रदेश। बहुजन समाज पार्टी के भीतर छिड़ी पारिवारिक और राजनीतिक जंग अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। पार्टी मुखिया मायावती ने एक बहुत बड़ा फैसला लेते हुए अपने भतीजे आकाश आनंद को दल से पूरी तरह बाहर कर दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह कदम तब उठाया गया, जब कुछ ही घंटों पहले आकाश आनंद के ससुर और पूर्व सांसद डॉ. अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति छोड़ने का ऐलान किया था।
ससुर के फैसले में देरी पड़ी भारी
पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब मायावती ने एक दिन पहले साफ कहा था कि, अगर आकाश आनंद को राजनीति में आगे बढ़ना है, तो उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को पीछे हटना होगा। इस शर्त के बाद, अशोक सिद्धार्थ ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट लिखकर हमेशा के लिए राजनीतिक और सामाजिक जीवन को अलविदा कह दिया। उन्होंने लिखा कि उनके लिए पार्टी का मिशन परिवार से बढ़कर है।
लेकिन, मायावती इस बात से बेहद खफा हो गईं कि अशोक सिद्धार्थ ने यह फैसला लेने में बहुत ज्यादा वक्त लगा दिया। उनका मानना है कि अगर यह कदम पहले उठाया जाता, तो न तो पार्टी का नुकसान होता और न ही आकाश आनंद का करियर दांव पर लगता।
'दोहरे दिमाग' से नहीं चल सकती राजनीति
भतीजे आकाश आनंद को बाहर का रास्ता दिखाते हुए मायावती ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि आकाश अपने राजनीतिक भविष्य और पार्टी के सिद्धांतों से ज्यादा अपने पारिवारिक रिश्तों को अहमियत दे रहे हैं। मायावती के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति दोहरे दिमाग के साथ आंदोलन को आगे नहीं बढ़ा सकता। यही वजह है कि, उन्होंने आकाश को आजाद करने का फैसला किया।
उत्तर प्रदेश में आने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले हुए इस बड़े बदलाव ने हर किसी को हैरान कर दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मायावती इस समय किसी भी तरह की गुटबाजी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं। वह पार्टी के कार्यकर्ताओं को यह संदेश देना चाहती हैं कि दल के नियमों से बढ़कर कोई नहीं है, चाहे वह उनका अपना ससुर या भतीजा ही क्यों न हो। इस फैसले के बाद अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है।

