मिडिल ईस्ट संकट: अमेरिका ने ईरान को दिया वीजा, द. कोरिया ने फौज भेजने से मना किया
5:02 PM, Sep 18, 2026
R Express भारत
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मिडिल ईस्ट में चल रही भारी खींचतान के बीच दो बेहद चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। एक तरफ जहां वाशिंगटन और तेहरान के बीच महीनों से सीधा मुकाबला चल रहा है,

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उत्तर प्रदेश। मिडिल ईस्ट में चल रही भारी खींचतान के बीच दो बेहद चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। एक तरफ जहां वाशिंगटन और तेहरान के बीच महीनों से सीधा मुकाबला चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप प्रशासन ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और उनके साथियों को न्यूयॉर्क आने की अनुमति दे दी है। उन्हें यह वीजा संयुक्त राष्ट्र की एक बड़ी बैठक में हिस्सा लेने के लिए दिया गया है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका के सबसे पक्के दोस्तों में से एक, दक्षिण कोरिया ने साफ़ कह दिया है कि वह इस जंग में अपनी फौज बिल्कुल नहीं भेजेगा।
दुश्मनी के बीच बातचीत का रास्ता?
दोनों देशों के बीच सात महीने से हिंसक टकराव जारी है, जिसने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। ऐसे माहौल में ईरानी नेताओं को अपने देश में कदम रखने की इजाज़त देना अमेरिका का एक बड़ा नीतिगत बदलाव माना जा रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, न्यूयॉर्क में होने वाली इस बैठक के लिए ईरान के 'मुख्य दल' को मंजूरी मिली है, जिसमें राष्ट्रपति पेजेशकियन के साथ उनके विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची भी शामिल हैं।
लेकिन, अमेरिका ने यह साफ़ कर दिया है कि इस छूट का मतलब यह नहीं है कि दोनों के रिश्ते सुधर गए हैं। ईरानी दल पर न्यूयॉर्क में रहने के दौरान कई कड़े नियम लागू रहेंगे। वे शहर में एक तय दायरे से बाहर नहीं घूम पाएंगे और उनके महंगे सामान खरीदने पर भी रोक रहेगी। इसके साथ ही इस बार आने वाले लोगों की संख्या भी पहले के मुकाबले काफी कम रखी गई है।
दक्षिण कोरिया ने दिखाई आंख
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी खेमे को एक बड़ा झटका दक्षिण कोरिया से लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार अपने साथी देशों पर दबाव बना रहे थे कि वे मिडिल ईस्ट के इस संकट में अपनी सेनाएं और हथियार भेजकर अमेरिका की मदद करें। लेकिन दक्षिण कोरिया के नेता ली जे-म्युंग ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीधे तौर पर इस मांग को खारिज कर दिया।
ली जे-म्युंग ने दोटूक शब्दों में कहा कि उनका देश किसी भी ऐसी गतिविधि में शामिल नहीं होगा जिससे वह सीधे तौर पर इस युद्ध का हिस्सा बन जाए। उन्होंने साफ़ किया कि वे केवल अपने व्यापारिक जहाजों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए सोमालिया के पास तैनात अपने समुद्री जहाजों का दायरा थोड़ा बढ़ा सकते हैं, लेकिन वे जंग लड़ने के लिए कोई सैनिक नहीं भेजेंगे।
बढ़ रहा है ट्रंप का गुस्सा
दक्षिण कोरिया के इस फैसले से अमेरिकी प्रशासन काफी नाराज दिखाई दे रहा है। ट्रंप पहले भी शिकायत कर चुके हैं कि अमेरिका दूसरे देशों की सुरक्षा के लिए अपने सैनिक तैनात रखता है, लेकिन जब अमेरिका को मदद की जरूरत होती है तो ये देश पीछे हट जाते हैं। इस नाराजगी का असर भी दिखने लगा है, क्योंकि अमेरिका ने दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले सालाना सैन्य अभ्यासों में इस बार बड़ी कटौती कर दी है।

