होमवीडियो
ब्रेकिंग
sliderimg

चिकित्सा जगत में चमत्कार: दो अस्पतालों ने मिलकर बचाई दो जान, रचा इतिहास!

5:44 PM, Sep 13, 2026

मुस्कान​ सिंह
R Express भारत

Share:

तमिलनाडु के कोयंबटूर से एक ऐसी खबर आई है जिसने भारत के मेडिकल इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया है। शहर के दो अलग-अलग अस्पतालों ने मिलकर देश का पहला 'इंटर-हॉ

चिकित्सा जगत में चमत्कार: दो अस्पतालों ने मिलकर बचाई दो जान, रचा इतिहास!

sketch generated by - ( CHAT CPT)

उत्तर प्रदेश।तमिलनाडु के कोयंबटूर से एक ऐसी खबर आई है जिसने भारत के मेडिकल इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया है। शहर के दो अलग-अलग अस्पतालों ने मिलकर देश का पहला 'इंटर-हॉस्पिटल लिवर स्वैप ट्रांसप्लांट' सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस बेहद जटिल और अनोखे ऑपरेशन की मदद से दो गंभीर रूप से बीमार मरीजों को एक नया जीवन मिला है। डॉक्टरों का मानना है कि यह कामयाबी आने वाले समय में देश के हजारों मरीजों के लिए वरदान साबित होगी जो डोनर न मिलने की वजह से जिंदगी की जंग हार जाते हैं।

क्या है यह पूरा मामला और कैसे हुआ चमत्कार?

यह पूरा मामला दो ऐसे परिवारों से जुड़ा है जिनके मरीजों को तुरंत लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत थी। दोनों परिवारों में रिश्तेदार अंग दान (लिवर डोनेट) करने के लिए तैयार भी थे, लेकिन दिक्कत यह थी कि उनका ब्लड ग्रुप अपने ही मरीज से मैच नहीं कर रहा था। ऐसे में कोयंबटूर के दो बड़े अस्पतालों—जीईएम हॉस्पिटल और श्री रामकृष्ण हॉस्पिटल ने हाथ मिलाया।

डॉक्टरों ने एक अनोखा रास्ता निकाला। उन्होंने तय किया कि पहले परिवार का डोनर दूसरे परिवार के मरीज को लिवर देगा और दूसरे परिवार का डोनर पहले परिवार के मरीज को। चूंकि दोनों मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती थे, इसलिए यह चुनौती और भी बड़ी थी।

हाई-टेक तकनीक और ग्रीन कॉरिडोर का कमाल

इस ऑपरेशन को अंजाम देना किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं था। दोनों अस्पतालों के डॉक्टरों के बीच पल-पल की बात साझा करने के लिए लाइव वीडियो फीड का इंतजाम किया गया। जैसे ही एक अस्पताल में लिवर निकाला गया, उसे बिना एक सेकंड गंवाए दूसरे अस्पताल पहुंचाने के लिए सड़क पर 'ग्रीन कॉरिडोर' बनाया गया। पुलिस की मदद से ट्रैफिक को रोककर एम्बुलेंस के लिए रास्ता साफ किया गया, ताकि अंग समय पर पहुंच सके।

मुफ्त में हुआ लाखों का इलाज

इस तरह की सर्जरी में आमतौर पर 20 से 30 लाख रुपये का भारी-भरकम खर्च आता है, जो किसी भी आम परिवार की कमर तोड़ सकता है। लेकिन इस मामले में सबसे अच्छी बात यह रही कि मरीजों के परिवारों को अपनी जेब से एक भी पैसा नहीं देना पड़ा। इस पूरे इलाज का खर्च मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत उठाया गया, जिससे इन गरीब परिवारों को नई जिंदगी के साथ-साथ आर्थिक राहत भी मिली।

यह ऐतिहासिक कामयाबी साबित करती है कि अगर अस्पताल और डॉक्टर मिलकर काम करें, तो तकनीक के सहारे किसी भी नामुमकिन काम को मुमकिन बनाया जा सकता है।

विज्ञापन

विज्ञापन

सम्बंधित खबर

अपना शहर

और देखें

विज्ञापन

Follow Us:

Download App

Play Store

Subscribe Now

Play StoreR Express Bharat
Develop & Design by SpriteEra IT Solutions

Copyright © RexpressBharat, 2026