बिहार में बदलाव की नई बयार: शिक्षा, स्वास्थ्य और कमाई के मौकों पर दिग्गजों का बड़ा मंथन
6:13 PM, Sep 20, 2026
R Express भारत
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बिहार अब सिर्फ अपनी पुरानी छवि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के विकास की रेस में एक नया मुकाम हासिल करने की ओर बढ़ रहा है।

sketch by - (chat AI )
बिहार अब सिर्फ अपनी पुरानी छवि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के विकास की रेस में एक नया मुकाम हासिल करने की ओर बढ़ रहा है। हाल ही में राजधानी पटना में आयोजित पंचायत आजतक बिहार कार्यक्रम के 'बिजनेस की बहार है... नया बिहार है!' सत्र में राज्य के विकास ग्राफ को लेकर एक बेहद गंभीर और सकारात्मक चर्चा देखने को मिली। इस खास मंच पर देश के जाने-माने नीति निर्माताओं और अलग-अलग क्षेत्रों के दिग्गजों ने हिस्सा लिया, जिनमें IIM बोधगया की डायरेक्टर डॉ. विनीता एस सहाय और मेदांता पटना के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. रवि शंकर सिंह मुख्य रूप से शामिल थे। कार्यक्रम में राज्य के भीतर पढ़ाई-लिखाई, इलाज के इंतजाम और नौजवानों के लिए काम-धंधे के नए मौकों को लेकर एक मुकम्मल खाका खींचा गया।
पढ़ाई का सुधरता स्तर और हुनरमंद युवा
चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात को पुरजोर तरीके से उठाया कि बिहार की सबसे बड़ी ताकत यहां के जुझारू युवा हैं। IIM बोधगया की प्रमुख डॉ. विनीता सहाय ने कहा कि राज्य के बारे में पुरानी सोच को बदलने का वक्त आ गया है। अब जरूरत इस बात की है कि यहाँ के नौजवानों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ आज के दौर के हिसाब से छोटे-छोटे टेक्निकल कोर्स और हुनर सिखाए जाएं। जब स्थानीय युवाओं का कौशल बेहतर होगा, तो वे यहीं रहकर नए बिजनेस शुरू कर सकेंगे और दूसरों को भी काम दे पाएंगे। उन्होंने इस बात पर भी खुशी जताई कि पढ़ाई पर होने वाला खर्च राष्ट्रीय औसत से बेहतर हो रहा है, लेकिन प्राथमिक स्तर पर इसे और ज्यादा मजबूत करने की दरकार है।
इलाज के लिए नहीं जाना होगा बाहर
स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में मेदांता पटना के डायरेक्टर डॉ. रवि शंकर सिंह ने एक बेहतरीन पहलू सामने रखा। उन्होंने कहा कि बिहार की भारी-भरकम आबादी अपने आप में चिकित्सा क्षेत्र के लिए एक बहुत बड़ा बाजार है। यदि राज्य में बड़े अस्पताल, अच्छी मेडिकल कॉलेज की सीटें और बेहतरीन लैब खुलती हैं, तो न सिर्फ स्थानीय लोगों को इलाज के लिए दिल्ली या मुंबई भागना पड़ेगा, बल्कि बाहर से भी डॉक्टर और निवेशक यहाँ खिंचे चले आएंगे। विश्वस्तरीय अस्पतालों के आने से डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ के तौर पर हजारों स्थानीय लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिल रहा है।
निवेश और कारोबार की नई उम्मीदें
मंच पर मौजूद विशेषज्ञों का साफ मानना था कि जब तक निजी क्षेत्र का पैसा और बड़ी कंपनियां बिहार में कदम नहीं रखेंगी, तब तक पलायन रोकना मुमकिन नहीं होगा। अच्छी बात यह है कि अब बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। होटल इंडस्ट्री से लेकर स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र की बड़ी कड़ियां राज्य में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं। अगर सड़क, बिजली और सुरक्षा के मोर्चे पर मिल रहे सहयोग को इसी तरह जारी रखा जाए, तो वह दिन दूर नहीं जब बिहार देश के टॉप कारोबारी राज्यों की सूची में शामिल होगा। कार्यक्रम में साफ हुआ कि शिक्षा और स्वास्थ्य के दोहरे इंजन पर सवार होकर बिहार एक समृद्ध और आत्मनिर्भर भविष्य की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

