अब 'जोड़ा फूल' नहीं, नए नाम और निशान से चुनाव लड़ेंगी ममता बनर्जी! जानिए पूरा मामला...
4:20 PM, Sep 19, 2026
R Express भारत
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। चुनाव आयोग ने एक चौंकाने वाले फैसले में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक नाम और उसके सबसे

sketch by - (AI )
उत्तर प्रदेश। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। चुनाव आयोग ने एक चौंकाने वाले फैसले में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक नाम और उसके सबसे बड़े पहचान चिह्न 'जोड़ा फूल' को पूरी तरह फ्रीज कर दिया है। इस फैसले के बाद राज्य में सियासी संग्राम चरम पर पहुंच गया है। अब कोई भी गुट आगामी 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनावों में इस पारंपरिक नाम और निशान के साथ मैदान में नहीं उतर पाएगा। यह फैसला पार्टी के दो गुटों के बीच चल रही आपसी लड़ाई का नतीजा है।
पार्टी के भीतर कैसे शुरू हुई ये जंग?
तृणमूल कांग्रेस के अंदर पिछले कुछ समय से संगठन पर कब्जे को लेकर खींचतान चल रही थी। बात तब और बिगड़ गई जब दोनों ही पक्षों ने खुद को असली तृणमूल बताते हुए उपचुनावों के लिए अपने-अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए और पार्टी के सिंबल पर दावा ठोक दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग ने एक अंतरिम आदेश जारी कर दोनों गुटों के लिए पुराने नाम और निशान के इस्तेमाल पर रोक लगा दी।
आयोग ने स्पष्ट किया कि जब तक इस विवाद का कोई अंतिम समाधान नहीं निकल जाता, तब तक दोनों खेमों को नए नाम और मुफ्त सिंबल की सूची से अलग निशानों का उपयोग करना होगा। इस कड़ी में ममता बनर्जी के गुट को अब 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' का चुनाव चिह्न मिला है। वहीं, विरोधी गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम के साथ 'लिफाफा' चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।
दिल्ली से लेकर बंगाल तक सियासी घमासान
इस फैसले के आते ही राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भाजपा और चुनाव आयोग को जमकर आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को कमजोर करने और उन्हें आपस में लड़ाने के लिए एक तय पैटर्न पर काम हो रहा है। राहुल गांधी ने शिवसेना और एनसीपी का उदाहरण देते हुए कहा कि यह देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं की गिरावट का एक और सबूत है, जहां पहले वोट, फिर सरकार और अब पूरी पार्टी ही चुराई जा रही है।
दूसरी तरफ, भाजपा ने राहुल गांधी के इन गंभीर आरोपों पर बेहद तीखा पलटवार किया है। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस को उसका पुराना इतिहास याद दिलाते हुए कहा कि ममता बनर्जी की टीएमसी और शरद पवार की एनसीपी किसी बाहरी साजिश की वजह से नहीं, बल्कि खुद कांग्रेस की अंदरूनी फूट के चलते उससे अलग होकर बनी थीं। भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्षी दल अपनी आपसी कलह और परिवारवाद की कमियों को छिपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर झूठे आरोप मढ़ रहे हैं।
कोर्ट पहुंची ममता बनर्जी
चुनाव आयोग के इस कड़े कदम से नाराज ममता बनर्जी ने इसे पूरी तरह एकतरफा और अन्यायपूर्ण बताया है। उन्होंने इस अंतरिम आदेश के खिलाफ सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ममता बनर्जी की याचिका में कहा गया है कि आयोग ने फैसला सुनाते समय पार्टी के जमीनी ढांचे और वास्तविक समर्थन को पूरी तरह नजरअंदाज किया है। अब देखना यह होगा कि देश की सबसे बड़ी अदालत से इस मामले में क्या मोड़ आता है, लेकिन फिलहाल 1998 के बाद पहली बार ऐसा होने जा रहा है जब बंगाल के चुनावों में 'जोड़ा फूल' का निशान गायब रहेगा।

