नोबेल शांति पुरस्कार 2026: दक्षिण अफ्रीका की नवी पिल्लै विजेता घोषित
6:19 PM, Oct 9, 2026
R Express भारत
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।साल 2026 के सबसे प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान हो चुका है। इस बार यह सम्मान दक्षिण अफ्रीका की 85 वर्षीय जांबाज महिला न्यायविद और मानवाधिकार कार्

sketch by - ( AI )
ओस्लो।साल 2026 के सबसे प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान हो चुका है। इस बार यह सम्मान दक्षिण अफ्रीका की 85 वर्षीय जांबाज महिला न्यायविद और मानवाधिकार कार्यकर्ता नवनेथम 'नवी' पिल्लै को देने का फैसला किया गया है। ओस्लो में नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने शुक्रवार को इस पुरस्कार की घोषणा की। नवी पिल्लै को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने, युद्ध अपराधों के खिलाफ आवाज उठाने और पीड़ितों को न्याय दिलाने के उनके ऐतिहासिक जीवनभर के संघर्ष के लिए चुना गया है।
क्यों चुना गया नवी पिल्लै को?
आज जब पूरी दुनिया अलग-अलग मोर्चों पर युद्ध और अशांति से जूझ रही है, ऐसे समय में नोबेल कमेटी ने नवी पिल्लै के नाम पर मुहर लगाकर एक बड़ा संदेश दिया है। कमेटी के मुताबिक, पिल्लै ने उस दौर में पीड़ितों की लड़ाई लड़ी जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों की बात करने की हिम्मत बहुत कम लोगों में होती थी। उन्होंने रवांडा नरसंहार से लेकर दुनिया के कई बड़े अंतरराष्ट्रीय विवादों में पीड़ितों को न्याय दिलाने में मुख्य भूमिका निभाई है।
रंगभेद के खिलाफ लड़ाई और शानदार सफर
नवी पिल्लै का पूरा जीवन संघर्ष की एक मिसाल है। दक्षिण अफ्रीका में जब रंगभेद का काला दौर चल रहा था, तब उन्होंने नस्लीय भेदभाव के खिलाफ मजबूती से कानूनी लड़ाई लड़ी। उन्होंने महान नेता नेल्सन मंडेला सहित कई राजनीतिक कैदियों के लिए अदालत में वकालत की थी। इसके बाद वह दक्षिण अफ्रीका के हाई कोर्ट की पहली गैर-श्वेत महिला जज बनीं। उनका सफर यहीं नहीं रुका; वह रवांडा के लिए बने अंतरराष्ट्रीय क्रिमिनल ट्रिब्यूनल की अध्यक्ष रहीं, इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट में जज रहीं और साल 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार चीफ के रूप में पूरी दुनिया में अपनी धाक जमाई।
भारत से है बेहद खास और गहरा नाता
भारत के लोगों के लिए यह खबर इसलिए भी गर्व की बात है क्योंकि नवी पिल्लै का भारत से बहुत गहरा कनेक्शन है। उनका जन्म 1941 में दक्षिण अफ्रीका के डरबन में एक भारतीय तमिल मूल के परिवार में हुआ था। उनके दादाजी भारत के तमिलनाडु राज्य के रहने वाले थे, जो बाद में काम के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका जाकर बस गए थे। भारतीय मूल की होने के नाते उन्होंने हमेशा वैश्विक मंचों पर भारत के संस्कृति और मूल्यों का सम्मान किया है।
क्या मिलेगा पुरस्कार में?
नोबेल शांति पुरस्कार के तहत नवी पिल्लै को एक गोल्ड मेडल, एक सर्टिफिकेट और करीब 11 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (लगभग 9 करोड़ रुपये से अधिक) की इनामी राशि दी जाएगी। यह पुरस्कार हर साल की तरह अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर यानी 10 दिसंबर को ओस्लो में एक भव्य समारोह के दौरान हाथ में सौंपा जाएगा।

