महिगवां के टिकरी गांव में लाठी-डंडों से सरेआम गुंडागर्दी; दो महिलाओं समेत 3 गंभीर, पुलिस के रवैये पर उठे सवाल
4:25 PM, Jul 14, 2026
R Express भारत
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लखनऊ के महिगवां थाना क्षेत्र के टिकरी गांव में पुश्तैनी बोरिंग को लेकर हुआ मामूली विवाद अब एक बड़े बवाल में बदल चुका है। जमीन से जुड़े इस झगड़े ने ऐसा हिंस

न्याय की गुहार लगाई फोटो सौ0 RExpress भारत
उत्तर प्रदेश।लखनऊ के महिगवां थाना क्षेत्र के टिकरी गांव में पुश्तैनी बोरिंग को लेकर हुआ मामूली विवाद अब एक बड़े बवाल में बदल चुका है। जमीन से जुड़े इस झगड़े ने ऐसा हिंसक रूप लिया कि लाठी-डंडे चलने से एक ही परिवार के तीन लोग लहूलुहान हो गए। घायलों में महिलाएं भी शामिल हैं, जिन्हें गंभीर चोटें आई हैं। इस मामले में पुलिसिया कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि पीड़ित पक्ष का आरोप है कि शिकायत के बावजूद पुलिस ठोस कदम उठाने के बजाय उन पर ही मामले को रफा-दफा करने का दबाव बना रही है।
ग्रामीण इलाकों में पानी और बोरिंग को लेकर अक्सर विवाद देखने को मिलते हैं, लेकिन टिकरी गांव में जो हुआ उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। पीड़िता सुनीता के मुताबिक, उनके परिवार का गांव के ही विक्रम नाम के व्यक्ति से पुश्तैनी बोरिंग को लेकर पुराना विवाद चल रहा था। घटना के दिन इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हुई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि विक्रम, उसकी पत्नी गुड़िया और बेटी अंशु ने लाठी-डंडों से लैस होकर सुनीता के परिवार पर हमला बोल दिया।
सिर पर आए टांके, बुजुर्ग महिला को भी नहीं बख्शा
यह हमला इतना खतरनाक था कि, बीच-बचाव करने आए लोग भी खुद को नहीं बचा सके। लाठी-डंडों के वार से सुनीता के सिर में गंभीर चोट आई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में करीब 4 टांके लगाने पड़े। वहीं, परिवार की दूसरी सदस्य प्रीति की हालत और भी खराब थी, जिनके सिर पर 6 टांके आए हैं। हमले में रामकुमार नाम के शख्स की आंख के पास गहरा जख्म हुआ है, जिससे उनकी आंख को भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि हमलावरों ने घर की बुजुर्ग मां जगदाई देवी पर भी तरस नहीं खाया और उन्हें भी पीट-पीटकर घायल कर दिया।
घटना के तुरंत बाद पीड़ितों ने महिगवां थाने पहुंचकर आपबीती सुनाई। पीड़ितों का आरोप है कि, पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस तो दर्ज कर लिया है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी गई हैं। वारदात को कई दिन बीत जाने के बाद भी हमलावर खुलेआम घूम रहे हैं और पीड़ितों को डरा-धमका रहे हैं।पीड़ित परिवार ने पुलिस के रवैये पर एक और चौंकाने वाला आरोप लगाया है। उनका कहना है कि, इंसाफ देने के बजाय कुछ पुलिसकर्मी उन पर लगातार इस बात का दबाव बना रहे हैं कि वे आरोपियों के साथ बैठकर मामला सुलझा लें। पीड़ितों का सवाल है कि, जब उनकी मां-बहनों के सिर फट गए, खून बह गया, तो वे किस आधार पर समझौता कर लें? क्या खाकी का काम गुंडों को पकड़ना है या पीड़ितों को चुप कराना?
उच्च अधिकारियों के दखल की उम्मीद
इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय पुलिस की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। ग्रामीण इलाके में कानून-व्यवस्था की ऐसी स्थिति चिंता पैदा करती है, जहां सरेआम महिलाओं को पीटा जाता है और पुलिस तमाशबीन बनी रहती है। अब इस मामले में जिले के बड़े पुलिस अफसरों के दखल की उम्मीद जताई जा रही है।

