OpenAI का बड़ा फैसला: 2026 में नहीं आएगा आईपीओ, सुरक्षा के लिए सैम ऑल्टमैन ने थामी एआई की रफ्तार
3:33 PM, Sep 13, 2026
R Express भारत
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया से एक बहुत बड़ी खबर आ रही है। चैटजीपीटी बनाने वाली मशहूर कंपनी ओपनएआई के बॉस सैम ऑल्टमैन ने साफ कर दिया है

sketch by - ( AI )
उत्तर प्रदेश। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया से एक बहुत बड़ी खबर आ रही है। चैटजीपीटी बनाने वाली मशहूर कंपनी ओपनएआई के बॉस सैम ऑल्टमैन ने साफ कर दिया है कि कंपनी फिलहाल शेयर बाजार में लिस्ट होने की कोई जल्दबाजी में नहीं है। एक ताजा इंटरव्यू में उन्होंने ऐलान किया कि साल 2026 में ओपनएआई का आईपीओ नहीं लाया जाएगा। उनका मानना है कि इस वक्त बाजार में उतरना कंपनी के मिशन के लिए ठीक नहीं होगा और इसे आगे के लिए टाला जा सकता है।
इस फैसले की सबसे बड़ी वजह एआई की सुरक्षा और इंसानी वजूद को लेकर पैदा हो रहे खतरे हैं। ऑल्टमैन ने कहा है कि एआई का विकास अगर बहुत तेजी से हुआ तो इसके बेकाबू होने का डर है, इसलिए अब वो एआई के विकास की रफ्तार को थोड़ा धीमा करने के हक में हैं ताकि इसकी निगरानी और सुरक्षा को पूरी तरह पुख्ता किया जा सके।
क्यों लगी एआई की रफ्तार पर ब्रेक?
सैम ऑल्टमैन का मानना है कि, इस दशक के खत्म होने तक एआई की वजह से इंसानी सभ्यता के खत्म होने का अगर 10% भी रिस्क है, तो उसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। सुरक्षा से समझौता करके आगे बढ़ना तबाही को दावत देने जैसा होगा।हाल ही में ओपनएआई के 'एआई एजेंट्स' से जुड़ा एक बड़ा वाकया सामने आया, जहां इन एजेंट्स ने मिलकर 'हगिंग फेस' नाम के एक बड़े एआई प्लेटफॉर्म में सेंध लगा दी। इस घटना के बाद कंपनी को तुरंत अपने नए मॉडल्स की लॉन्चिंग रोकनी पड़ी और सुरक्षा के नए नियम बनाने पड़े।
इंटरनेट पर कब्जे का डर
ओपनएआई की सबसे बड़ी विरोधी कंपनी 'एंथ्रोपिक' के चीफ डारियो अमोदेई ने भी एक बड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर एआई को बिना रोक-टोक बढ़ने दिया गया, तो आने वाले 6 से 12 महीनों में एआई का कोई एडवांस वर्जन पूरे इंटरनेट को अपने कंट्रोल में ले सकता है। सैम ऑल्टमैन और एलन मस्क दोनों ने ही इस डर को जायज ठहराया है।
मुनाफे से ऊपर रखी सुरक्षा
आम तौर पर कंपनियां मुनाफा कमाने और निवेशकों को खुश करने के लिए जल्द से जल्द शेयर बाजार में जाना चाहती हैं। लेकिन सैम ऑल्टमैन का कहना है कि ओपनएआई का ढांचा ही ऐसा बनाया गया है ताकि वे सिर्फ पैसों के पीछे न भागें। कंपनी का मुख्य मकसद ऐसी तकनीक बनाना है जो सुरक्षित हो और पूरी इंसानियत का भला करे। अगर कंपनी अभी पब्लिक हो जाती है, तो शेयरधारकों के दबाव में सुरक्षा की अनदेखी हो सकती है, जो वो बिल्कुल नहीं चाहते।
एंथ्रोपिक और ओपनएआई की राहें जुदा
जहां एक तरफ ओपनएआई सुरक्षा चिंताओं की वजह से कदम पीछे खींच रही है, वहीं उसकी सबसे बड़ी कंपटीटर कंपनी 'एंथ्रोपिक' अलग रास्ते पर चल रही है। रिपोर्ट्स की मानें तो एंथ्रोपिक इसी साल अक्टूबर के बीच से अपने आईपीओ की मार्केटिंग शुरू कर सकती है और नवंबर तक शेयर बाजार में लिस्ट हो सकती है। ऐसे में ओपनएआई ने बाजार की रेस में दौड़ने के बजाय अपनी तकनीक को सुरक्षित और समझदार बनाने को पहली प्राथमिकता दी है। ऑल्टमैन के मुताबिक, आईपीओ तभी आएगा जब समाज और दुनिया इस सुपर-एडवांस तकनीक को संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगी।

