दिल्ली में विपक्षी महामंथन: मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की तैयारी
1:42 PM, Sep 30, 2026
R Express भारत
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देश की राजधानी दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में विपक्षी दलों के साझा मंच 'INDIA' की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक चल रही है। इस बैठक का मुख्य मकसद देश के मुख्य

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देश की राजधानी दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में विपक्षी दलों के साझा मंच 'INDIA' की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक चल रही है। इस बैठक का मुख्य मकसद देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और हाल ही में वोटर लिस्ट में किए गए बदलावों को लेकर साझा रणनीति तैयार करना है। विपक्षी खेमे का आरोप है कि चुनाव कराने वाली मुख्य संस्था निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रही है और वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की जा रही है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ बड़ा कदम उठाने की तैयारी
बैठक से जुड़े अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए एक कानूनी प्रस्ताव का मसौदा तैयार कर लिया है। इस बैठक में उस मसौदे पर अंतिम मुहर लगाई जा सकती है, जिसके बाद इसे संसद के पटल पर रखने की तैयारी की जा रही है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे इस मुद्दे को सिर्फ संसद तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि आने वाले दिनों में चुनाव संस्था के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और रैलियां भी आयोजित करेंगे।
क्यों मचा है सियासी घमासान?
इस पूरे विवाद की जड़ में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों का आरोप है कि इस अभियान के नाम पर करोड़ों वैध मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से जानबूझकर हटा दिए गए हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि इस पूरी प्रक्रिया को तुरंत रोक दिया जाए और जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें वापस जोड़ा जाए। वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस प्रक्रिया पर तीखे सवाल उठाए हैं और इसे निष्पक्षता के खिलाफ बताया है।
बैठक में कौन शामिल, किसने बनाई दूरी?
इस हाई-प्रोफाइल बैठक में कांग्रेस की ओर से मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, राजद के तेजस्वी यादव और नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला जैसे दिग्गज नेता भी रणनीति बनाने में जुटे हैं।
हालांकि, विपक्षी एकजुटता के बीच कुछ मतभेद भी उभर कर सामने आए हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम जैसी बड़ी पार्टियों ने इस बैठक से दूरी बना ली है। वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव अपने कुछ जरूरी व्यस्तताओं के चलते खुद शामिल नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने अपनी पार्टी की तरफ से दो प्रतिनिधियों को इस चर्चा में भेजा है।
आरोपों पर चुनाव संस्था का क्या है कहना?
विपक्ष के इन गंभीर आरोपों के बीच चुनाव संस्था से जुड़े आधिकारिक सूत्रों ने इसे एक सुनियोजित हमला बताया है। संस्था का कहना है कि मतदाता सूची की सफाई और उसमें से फर्जी या मृत लोगों के नाम हटाना एक पूरी तरह से कानूनी और नियमित प्रक्रिया है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस प्रक्रिया से जुड़े सभी बड़े फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त और बाकी दोनों आयुक्तों की आपसी सहमति से ही लिए गए थे।

