Parivartini Ekadashi: आज भूलकर भी न खाएं चावल, यह है पारण का समय
12:15 PM, Sep 22, 2026
R Express भारत
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सनातन धर्म में एकादशी व्रत का बहुत बड़ा महत्व है, और जब बात भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी की हो, तो इसका महत्व दोगुना हो जाता है।

sketch by - ( AI )
उत्तर प्रदेश।सनातन धर्म में एकादशी व्रत का बहुत बड़ा महत्व है, और जब बात भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी की हो, तो इसका महत्व दोगुना हो जाता है। इस पावन तिथि को परिवर्तिनी एकादशी या पद्मा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस साल यह व्रत आज यानी 22 सितंबर 2026 को पूरे देश में बेहद श्रद्धा के साथ रखा जा रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु क्षीर सागर में योग निद्रा में होते हैं। आज ही के दिन वे अपनी करवट बदलते हैं, जिसकी वजह से इसे 'परिवर्तिनी एकादशी' कहा जाता है। इस खास मौके पर श्रीहरि के वामन रूप की आराधना की जाती है। माना जाता है कि आज के दिन व्रत रखने से वाजपेयी यज्ञ के समान पुण्य मिलता है।
भगवान वामन की पूजा का शुभ मुहूर्त
आज के दिन पूजा-पाठ के लिए सबसे उत्तम समय यानी अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:50 बजे से शुरू होकर 12:38 बजे तक रहेगा। इस दौरान की गई पूजा का फल कई गुना बढ़कर मिलता है।
इस विधि से करें पूजा, बरसेगी कृपा
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े (संभव हो तो पीले रंग के) पहनकर व्रत का संकल्प लें।पूजा घर में भगवान विष्णु या उनके वामन अवतार की मूर्ति को गंगाजल से स्नान कराएं।भगवान को पीले फूल, पीले फल, धूप-दीप और नैवेद्य चढ़ाएं। ध्यान रहे कि पूजा में तुलसी दल (पत्ते) जरूर शामिल करें, क्योंकि इसके बिना विष्णु जी की पूजा अधूरी मानी जाती है।ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें और अंत में आरती गाएं।
भूलकर भी न करें ये गलतियां
एकादशी के दिन कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। इस दिन घर में चावल (भात) बनाना और खाना पूरी तरह वर्जित होता है। इसके साथ ही घर के माहौल को पूरी तरह सात्विक रखें, लहसुन-प्याज का इस्तेमाल न करें और किसी के प्रति मन में कड़वाहट न लाएं। शाम को तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाना न भूलें।
कल होगा व्रत का पारण
धार्मिक नियमों के अनुसार, एकादशी व्रत का पूरा फल तभी मिलता है जब इसका समय पर पारण (व्रत खोलना) किया जाए। इस व्रत का पारण कल यानी 23 सितंबर 2026 को सुबह किया जाएगा। कल सुबह उठकर स्नान के बाद भगवान की पूजा करें, किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान-दक्षिणा या भोजन दें और फिर अपना व्रत खोलें।

