गर्मियों में यूपी की जनता को लगा करंट: बिजली बिल में 10% की भारी बढ़ोतरी, जून से जेब होगी ढीली
1:40 PM, May 30, 2026
R Express भारत
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भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच उत्तर प्रदेश के आम नागरिकों के लिए एक बेहद परेशान करने वाली खबर आ रही है। प्रदेश में बिजली की अघोषित कटौती और लो-वोल्टेज

यूपी में बिजली हुई महंगी sketch by- google
लखनऊ। भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच उत्तर प्रदेश के आम नागरिकों के लिए एक बेहद परेशान करने वाली खबर आ रही है। प्रदेश में बिजली की अघोषित कटौती और लो-वोल्टेज की मार झेल रहे उपभोक्ताओं को अब अपनी जेब और ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने राज्य में बिजली की दरों को बढ़ाने का पूरा मन बना लिया है। बिजली विभाग अब उपभोक्ताओं से 'ईंधन अधिभार' यानी फ्यूल सरचार्ज के नाम पर सीधे 10 फीसदी अतिरिक्त वसूलने जा रहा है। सबसे बड़ा झटका यह है कि यह बढ़ी हुई दरें इसी महीने यानी जून के पहले हफ्ते से आने वाले बिलों में जुड़कर आ जाएंगी।
पावर कॉरपोरेशन के भीतर से आ रही खबरों के मुताबिक, मार्च के महीने में राज्य में बिजली की मांग उम्मीद से कई गुना ज्यादा बढ़ गई थी। इस मांग को पूरा करने के लिए विभाग को पावर ग्रिड और अन्य बाहरी निजी स्रोतों से बहुत ही महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ी। इसके अलावा, कोयले और गैस जैसी उत्पादन सामग्रियों की कीमतों में भी भारी उछाल आया है। बिजली विभाग का कहना है कि इस अतिरिक्त वित्तीय घाटे और बढ़े हुए खर्च की भरपाई करने के लिए ही ईंधन और बिजली खरीद समायोजन अधिभार लगाने का यह कड़ा फैसला लिया गया है। यह नया नियम केवल बड़े उद्योगों पर ही नहीं, बल्कि आम घरेलू उपभोक्ताओं और छोटे दुकानदारों (कमर्शियल) पर भी समान रूप से लागू होगा।
इस फैसले के आते ही ग्राउंड पर जनता के बीच भारी गुस्सा देखा जा रहा है। ग्रामीण इलाकों से लेकर जिला मुख्यालयों तक लोग इस बात से नाराज हैं कि एक तो चौबीस घंटे में से बमुश्किल कुछ घंटे ही सही से बिजली मिल पाती है, ऊपर से आए दिन होने वाली ट्रिपिंग और अघोषित कटौती ने जीना मुहाल कर रखा है। लखनऊ के रहने वाले एक स्थानीय निवासी ने बताया, "इस तपती धूप में कूलर-पंखे भी ठीक से नहीं चल पा रहे हैं, और सरकार ने चुपके से बिल बढ़ाने का फरमान जारी कर दिया। यह सीधे-सीधे आम आदमी के बजट पर डाका डालने जैसा है।
वहीं दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस फैसले को पूरी तरह जनविरोधी करार देते हुए इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। परिषद के पदाधिकारियों का साफ कहना है कि बिजली कंपनियों के आंतरिक कुप्रबंधन और लाइन लॉस का खामियाजा राज्य की बेकसूर जनता से क्यों वसूला जा रहा है? उन्होंने बिजली नियामक आयोग से मांग की है कि इस तानाशाही फैसले को तुरंत वापस लिया जाए। बहरहाल, अगर सरकार इस पर कोई राहत नहीं देती है, तो जून के महीने से उत्तर प्रदेश के करीब साढ़े तीन करोड़ परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह से गड़बड़ाने वाला है।

