यमुना में जहरीला झाग: छठ पूजा से पहले दिल्ली-NCR में बढ़ा सेहत का खतरा
4:26 PM, Oct 24, 2026
R Express भारत
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दिल्ली-एनसीआर का सबसे बड़ा लोक महापर्व 'छठ पूजा' बेहद करीब है। ऐसे में व्रती और श्रद्धालु त्योहार की तैयारियों में जुटे हैं।

sketch by - ( AI )
दिल्ली-एनसीआर का सबसे बड़ा लोक महापर्व 'छठ पूजा' बेहद करीब है। ऐसे में व्रती और श्रद्धालु त्योहार की तैयारियों में जुटे हैं। लेकिन इसी बीच दिल्ली के कालिंदी कुंज से डराने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। यहां यमुना नदी की सतह पर सफेद और जहरीले झाग की एक मोटी परत तैरती हुई दिखाई दे रही है। नदी का यह नजारा किसी बर्फीली वादी जैसा लग रहा है, लेकिन असलियत में यह एक जानलेवा प्रदूषण है, जिसने त्योहार से ठीक पहले लोगों की सेहत और सुरक्षा पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
फेस्टिवल सीजन में बढ़ा सेहत का रिस्क
हर साल की तरह इस बार भी त्योहारों के आते ही यमुना की हालत बद से बदतर हो गई है। छठ पूजा के दौरान लाखों श्रद्धालु भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए नदी के पानी में उतरते हैं। कई नियमों और परंपराओं के मुताबिक, व्रतियों को पानी में खड़े होकर ही पूजा संपन्न करनी होती है। ऐसे में इस जहरीले पानी के सीधे संपर्क में आने से लोगों को त्वचा की गंभीर बीमारियां, एलर्जी, आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत जैसी परेशानियां हो सकती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह पानी सेहत के लिए बेहद खतरनाक है।
आखिर क्यों बनता है यह सफेद झाग?
यमुना में तैरते इस सफेद झाग के पीछे फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा पानी और घरों में इस्तेमाल होने वाला डिटर्जेंट है। दिल्ली और आसपास के इलाकों से निकलने वाला बिना साफ किया हुआ सीवेज जब नदी में गिरता है, तो उसमें मौजूद फॉस्फेट और अन्य केमिकल पानी में घुलकर इस तरह का झाग पैदा करते हैं। जब पानी ऊंचाई से गिरता है, तो यह केमिकल फेन का रूप ले लेता है, जो हवा के साथ उड़कर आस-पास के रास्तों तक भी पहुंच जाता है।
प्रशासन के दावों पर उठे सवाल
त्योहार को देखते हुए हर बार सरकार और प्रशासन की तरफ से नदी को साफ करने और पुख्ता इंतजाम करने के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं। लेकिन धरातल पर कालिंदी कुंज की ये तस्वीरें प्रशासन के सभी दावों की पोल खोल रही हैं। घाटों पर पूजा की तैयारी कर रहे स्थानीय लोगों और समितियों में इस बात को लेकर काफी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस झाग को नहीं हटाया गया, तो इस बार छठ पूजा करना बेहद मुश्किल और जोखिम भरा हो जाएगा।
अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में प्रशासन इस स्थिति से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है, ताकि श्रद्धालु बिना किसी डर के अपना महापर्व मना सकें।

