इजरायल में सियासी घमासान: क्या सातवीं बार कुर्सी बचा पाएंगे नेतन्याहू?
4:18 PM, Oct 30, 2026
R Express भारत
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इजरायल में हुए ताजा चुनावी दंगल के नतीजों ने देश की राजनीति में एक बड़ा भूचाल ला दिया है। काफी समय से चल रही खींचतान के बाद जब आखिरी वोटों की गिनती पूरी हु

sketch by - ( AI )
इजरायल में हुए ताजा चुनावी दंगल के नतीजों ने देश की राजनीति में एक बड़ा भूचाल ला दिया है। काफी समय से चल रही खींचतान के बाद जब आखिरी वोटों की गिनती पूरी हुई, तो साफ हो गया कि जनता ने किसी भी एक गुट को साफ तौर पर देश चलाने की चाबी नहीं सौंपी है। इस त्रिशंकु स्थिति के कारण प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए सातवीं बार देश की कमान संभालना बेहद मुश्किल नजर आ रहा है।
कुल 120 सीटों वाले सदन में इस बार सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़ा 61 सीटों का था। लेकिन नेतन्याहू का दक्षिणपंथी गुट सिर्फ 53 सीटों पर ही सिमट कर रह गया। वहीं दूसरी तरफ, उनके सबसे बड़े विरोधी गादी आइजेंकोट की अगुवाई वाले विपक्षी गठबंधन ने दमदार प्रदर्शन करते हुए 48 सीटें अपने पाले में कर ली हैं। इस पूरे चुनाव में सबसे बड़ा उलटफेर अरब मूल की पार्टियों ने किया है, जिन्होंने मिलकर रिकॉर्ड 19 सीटें जीती हैं। अब यही पार्टियां इस सियासी खेल की असली 'किंगमेकर' बनकर उभरी हैं।
इस कड़े मुकाबले में करीब 78 प्रतिशत वोटिंग हुई, जो पिछले कई सालों में सबसे ज्यादा है। नेतन्याहू की पार्टी 'लिकुड' सबसे बड़ी पार्टी तो बन गई है, लेकिन अपने दम पर या पुराने साथियों के भरोसे वह बहुमत से काफी दूर रह गए हैं। अब देश की बागडोर किसके हाथ में जाएगी, इसका फैसला आने वाले हफ्तों में होने वाली आपसी जोड़-तोड़ और गुप्त समझौतों पर टिका है।
अब यहां से आगे तीन रास्ते दिखाई दे रहे हैं। पहला यह कि नेतन्याहू विपक्ष के कुछ नेताओं को तोड़कर अपनी तरफ मिला लें।दूसरा रास्ता यह है कि, विपक्ष के नेता गादी आइजेंकोट अरब पार्टियों के साथ हाथ मिलाकर कोई नया मोर्चा खड़ा कर दें। अगर यह दोनों ही रास्ते बंद हो जाते हैं, तो देश में फिर से चुनाव कराने के अलावा कोई और चारा नहीं बचेगा। फिलहाल सभी दल पर्दे के पीछे से एक-दूसरे से संपर्क साधने और सौदेबाजी करने में जुट गए हैं। आने वाले कुछ दिन इजरायल के भविष्य के लिए बेहद नाजुक होने वाले हैं।

