दिल्ली में सियासी घमासान: विपक्ष का प्रदर्शन, कई बड़े नेता पकड़े गए
2:18 PM, Oct 4, 2026
R Express भारत
Share:
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चुनावी लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए विभिन्न विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने एक बड़ा मोर्चा खोला, जिसके बाद पुलिस ने कई बड़े

sketch by - ( AI )
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चुनावी लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए विभिन्न विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने एक बड़ा मोर्चा खोला, जिसके बाद पुलिस ने कई बड़े नेताओं और सैकड़ों कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। इस प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग कर रहे थे, जिसके कारण इलाके में भारी तनाव फैल गया।
विपक्षी खेमे का दावा है कि वोटिंग लिस्ट को अपडेट करने के नाम पर जानबूझकर आम जनता के नाम हटाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया की आड़ में लाखों असली वोटर्स के अधिकारों को छीना जा रहा है। इसी के विरोध में युवाओं और छात्र संगठनों, विशेष रूप से 'कॉकरोच जनता पार्टी' और आइसा ने एक जुट होकर दिल्ली में 'चलो दिल्ली' आंदोलन का आह्वान किया। मुंबई के शिवाजी पार्क से लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर तक इस अभियान को लेकर युवाओं में भारी जोश देखा गया। संगठन के प्रमुखों का कहना है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आने वाले दिनों में देश भर से लोग आकर दिल्ली में डेरा डालेंगे।
इस आंदोलन को रोकने के लिए प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अपनाया। जंतर-मंतर के आस-पास के पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई और किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। प्रदर्शन बढ़ने पर पुलिस ने आम आदमी पार्टी के प्रमुख चेहरों, आतिशी और सौरभ भारद्वाज के साथ-साथ विपक्षी सांसद मनोज झा और छात्र नेता नेहा बोरा समेत लगभग 700 से अधिक लोगों को जबरन बस में बैठाकर हिरासत में ले लिया। इस सुरक्षा घेरे के कारण आम जनता को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। एहतियात के तौर पर राजीव चौक और केंद्रीय सचिवालय जैसे दिल्ली के 12 व्यस्त मेट्रो स्टेशनों के रास्ते बंद कर दिए गए और इलाके में कुछ घंटों के लिए मोबाइल इंटरनेट भी ठप कर दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम पर देश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हिरासत में लिए गए लोगों के साथ हुए व्यवहार पर तीखी आपत्ति जताई है और सीधे गृह मंत्री अमित शाह से इस पर जवाब मांगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठाने वालों को दबाया जा रहा है। दूसरी तरफ, सत्ता पक्ष और इस पूरी प्रक्रिया को संभालने वाले महकमे ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह एक सामान्य और रूटीन काम है, जिसका मकसद केवल फर्जी और गलत नामों को लिस्ट से बाहर निकालना है ताकि वोटिंग प्रक्रिया को साफ-सुथरा रखा जा सके।

