मथुरा मंदिर पर पोस्टर वार: अखिलेश को न्योते से यूपी में सियासी भूचाल
5:13 PM, Oct 4, 2026
R Express भारत
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मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण को लेकर शुरू हुई 'अंतरराष्ट्रीय धर्म संसद' ने उत्तर प्रदेश के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

sketch by -* ( AI )
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण को लेकर शुरू हुई 'अंतरराष्ट्रीय धर्म संसद' ने उत्तर प्रदेश के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। 4 अक्टूबर को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में होने वाले इस बड़े आयोजन से ठीक पहले राजधानी की सड़कों पर लगे कुछ पोस्टरों ने राजनीतिक भूचाल ला दिया है। यह विवाद तब और गहरा गया जब विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को इस कार्यक्रम का न्योता भेज दिया।
पोस्टर के तीखे बोल और सीधा वार
लखनऊ में अखिलेश यादव के घर के बाहर और वीआईपी चौराहों पर लगे ये पोस्टर इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। परिषद की महिला विंग की मुखिया प्रियंका ठाकुर और प्रदेश अध्यक्ष बादल यादव की तरफ से लगाए गए इन पोस्टरों पर भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर के साथ बेहद तल्ख बातें लिखी गई हैं। पोस्टरों के जरिए सपा सुप्रीमो पर सीधा तंज कसते हुए पूछा गया है कि क्या वे वोटों की खातिर सिर्फ ईदगाह जाएंगे या फिर सनातनियों का साथ देने इस धर्म संसद में भी कदम रखेंगे? पोस्टरों पर नीचे साफ अक्षरों में लिखा है— "अयोध्या-काशी तो बस झांकी है, अब केवल मथुरा ही बाकी है।"
अखिलेश यादव को घेरने की रणनीति?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस आमंत्रण के पीछे सपा को बैकफुट पर धकेलने की एक सोची-समझी रणनीति है। आयोजकों का कहना है कि चूंकि अखिलेश यादव खुद को यदुवंशी (भगवान कृष्ण का वंशज) बताते हैं, इसलिए उन्हें मथुरा में मंदिर निर्माण के इस महाभियान में खुलकर अपनी राय रखनी चाहिए और विदेशी आक्रांताओं की निशानियों को हटाने में सहयोग करना चाहिए। इस धर्म संसद में देश-विदेश के कई बड़े संतों और 21 देशों के प्रतिनिधियों के जुटने का दावा किया जा रहा है।
पलटवार और अंदरूनी सियासत
इस पोस्टर वार के सामने आते ही उत्तर प्रदेश का सियासी बाजार पूरी तरह गरमा गया है। समाजवादी पार्टी के खेमे में इस निमंत्रण को लेकर तीखी नाराजगी है। सपा नेताओं का अंदरूनी तौर पर कहना है कि यह सब विपक्षियों की चाल है, जिसका मकसद जनता के बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाना और चुनाव से पहले धार्मिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देना है। वहीं दूसरी तरफ, सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर समर्थकों और विरोधियों के बीच जमकर बहस छिड़ गई है। फिलहाल इस एक पोस्टर ने सूबे की राजनीति में 'मथुरा' के एजेंडे को दोबारा सबसे ऊपर ला दिया है।

