सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेंगे जजों के पद, हंगामे के बीच लोकसभा से नया बिल पास
5:42 PM, Aug 4, 2026
R Express भारत
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देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर आ रही है। सुप्रीम कोर्ट में जजों की कमी को दूर करने के लिए लोकसभा में एक नया कानून पास कर द

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उत्तर प्रदेश। देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर आ रही है। सुप्रीम कोर्ट में जजों की कमी को दूर करने के लिए लोकसभा में एक नया कानून पास कर दिया गया है। सोमवार को संसद के निचले सदन में भारी विरोध और हंगामे के बीच 'सुप्रीम कोर्ट संसोधन बिल 2026 को मंजूरी दे दी गई। इस नए कानून के आने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या बढ़ाकर 38 कर दी जाएगी, जिसमें देश के मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हैं। अभी तक कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश को मिलाकर कुल 34 जज ही बैठ सकते थे।
इस फैसले की सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इस पर संसद में कोई चर्चा या बातचीत नहीं हो सकी। विपक्ष के सांसद लगातार अलग-अलग मुद्दों को लेकर नारेबाजी कर रहे थे और सदन के बीचों-बीच आकर विरोध जता रहे थे। इसी शोर-शराबे के बीच कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस बिल को सामने रखा और सदन ने बिना किसी बहस के इसे सीधे वोटिंग के जरिए पास कर दिया।
क्यों पड़ी जजों की संख्या बढ़ाने की जरूरत?
सरकार का कहना है कि, देश की सबसे बड़ी अदालत पर मुकदमों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। साल की शुरुआत के आंकड़ों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में करीब 92,000 से ज्यादा मामले पेंडिंगपड़े हैं। जजों की कमी के कारण लोगों को तारीख पर तारीख मिलती है और इंसाफ मिलने में सालों लग जाते हैं। अब जजों की संख्या 34 से बढ़कर 38 होने से नए बेंच बनाए जा सकेंगे, जिससे पुराने मामलों का निपटारा तेजी से हो सकेगा। आपको बता दें कि इस साल मई के महीने में सरकार एक आपातकालीन नियम लेकर आई थी, अब उसी नियम को पक्के कानून में बदल दिया गया है।
जब यह कानून पास हो रहा था, तब विपक्षी दल के नेता शांत नहीं थे। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के सांसद जंतर-मंतर पर छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई और अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के कथित आरोपों को लेकर गृहमंत्री अमित शाह से जवाब मांग रहे थे। विपक्ष की मांग थी कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद दखल दें। हंगामे की वजह से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को कई बार सदन की कार्रवाई रोकनी पड़ी, लेकिन दोपहर बाद इसे पास करा लिया गया।
दो और नए बदलावों की शुरुआत
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक नया बैंकिंग बिल पेश किया है। इसके तहत 1891 के पुराने कानून को हटाकर अब कंप्यूटर, क्लाउड और डिजिटल माध्यम से रखे गए बैंक रिकॉर्ड्स को कोर्ट में पक्के सबूत के तौर पर माना जाएगा। देश के बड़े सांख्यिकी संस्थान के पुराने 1959 के नियम को बदलकर उसे एक नई कॉर्पोरेट बॉडी बनाने की तैयारी है, जिसे एक खास बोर्ड चलाएगा।देश की न्याय व्यवस्था को रफ्तार देने के लिए जजों की संख्या बढ़ाने का यह कदम बेहद जरूरी माना जा रहा है, हालांकि बिना बहस के कानून पास होने पर राजनीति गरमाई हुई है।

