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रामलीला मैदान से राहुल गांधी का बड़ा ऐलान: वोट चोरी के मुद्दे पर दिल्ली में जुटेगा विपक्ष

6:58 PM, Oct 25, 2026

मुस्कान​ सिंह
R Express भारत

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देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने वाला है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा पोस्ट साझा किया है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल

रामलीला मैदान से राहुल गांधी का बड़ा ऐलान: वोट चोरी के मुद्दे पर दिल्ली में जुटेगा विपक्ष

Sketch by - (AI)

देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने वाला है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा पोस्ट साझा किया है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। राहुल गांधी आगामी 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में एक विशाल 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली करने जा रहे हैं। उन्होंने साफ तौर पर आरोप लगाया है कि देश में आम जनता के वोटों के साथ खिलवाड़ हो रहा है और मतदाता सूचियों से जानबूझकर नाम गायब किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि अब वक्त आ गया है जब पूरा देश मिलकर इस धांधली का करारा जवाब देगा।

इस रैली को लेकर विपक्षी खेमे में भारी उत्साह देखा जा रहा है। विपक्षी नेताओं का मानना है कि यह आयोजन सिर्फ एक आम जनसभा नहीं, बल्कि चुनाव व्यवस्था में आ रही कमियों के खिलाफ एक बड़ा जन-आंदोलन बनेगा। रैली की मुख्य मांग चुनाव अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना और व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है। मुख्य आयोजन से ठीक पहले, यानी 30 अक्टूबर को विपक्ष दिल्ली के एक बड़े होटल में 'मॉक संसद' भी आयोजित करने जा रहा है, जिसमें वे सरकार की नीतियों को जनता के सामने बेनकाब करने की रणनीति तैयार करेंगे। इस रणनीति के तहत सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक एक बड़ा अभियान चलाया जाएगा।

दूसरी तरफ, इस रैली को लेकर विवाद भी शुरू हो गया है। दिल्ली के स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने राहुल गांधी से गुहार लगाई है कि दिवाली के त्योहार के सीजन को देखते हुए इस रैली को 10 नवंबर के बाद कराया जाए। व्यापारियों का कहना है कि त्योहारों के समय दिल्ली के बाजारों में भारी भीड़ होती है, और ऐसे में बड़ी रैली होने से ट्रैफिक जाम होगा जिससे उनका करोड़ों का कारोबार ठप हो सकता है। वहीं, सत्ता पक्ष ने भी 1 नवंबर की तारीख पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि यह दिन देश के इतिहास में एक काले अध्याय (1984 के दंगों) से जुड़ा है, इसलिए इस दिन रैली करना असंवेदनशील है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच चल रही इस जुबानी जंग ने नवंबर की शुरुआत से पहले ही दिल्ली का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

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