राजस्थान शहर चुनाव: भाजपा सबसे आगे, लेकिन दिग्गजों के गढ़ में निर्दलीय बने 'किंगमेकर'
6:22 PM, Sep 15, 2026
R Express भारत
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राजस्थान के शहरों और कस्बों में हुए हालिया चुनावों के नतीजे पूरी तरह साफ हो चुके हैं। इस चुनावी जंग में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य स्तर

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राजस्थान के शहरों और कस्बों में हुए हालिया चुनावों के नतीजे पूरी तरह साफ हो चुके हैं। इस चुनावी जंग में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य स्तर पर सबसे ज्यादा सीटें जीतकर अपनी बढ़त तो बना ली है, लेकिन पार्टी के लिए यह जीत पूरी तरह से जश्न मनाने वाली नहीं रही। राज्य के सबसे बड़े नेताओं के अपने ही गढ़ों में विपक्षी पार्टी कांग्रेस और आज़ाद (निर्दलीय) उम्मीदवारों ने ऐसा जाल बुना कि भाजपा का पूरा गणित गड़बड़ा गया।
इन नतीजों में सबसे बड़ा उलटफेर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रभाव वाले इलाकों में देखने को मिला है। नेताओं के अपने ही क्षेत्रों में पार्टी को बहुमत की सीढ़ियों तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया।
भरतपुर में मुख्यमंत्री के घर में निर्दलीयों का दबदबा
सबसे बड़ा झटका मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में लगा है। यहां के शहरी चुनाव में भाजपा को स्पष्ट रूप से बहुमत की जादुई संख्या हासिल नहीं हो सकी। भरतपुर की सीटों पर इस बार जनता ने किसी बड़ी पार्टी के बजाय आज़ाद चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों पर सबसे ज्यादा भरोसा जताया। 65 में से 36 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने एकतरफा जीत दर्ज की है। अब इस इलाके में सत्ता की चाबी पूरी तरह से इन निर्दलीयों के हाथों में आ गई है, और उनके समर्थन के बिना किसी भी पार्टी का बोर्ड बनना नामुमकिन है।
पाली और झालावाड़ में भी स्थिति खराब
यही हाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के क्षेत्र पाली में भी देखने को मिला। पाली में कांग्रेस ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 29 सीटों पर अपना परचम लहराया, जबकि भाजपा सिर्फ 21 सीटों पर सिमट कर रह गई। यहां भी 15 सीटों पर आज़ाद उम्मीदवारों ने बाजी मारी। वहीं, दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रभाव वाले क्षेत्र झालावाड़ में कांग्रेस ने बड़ा उलटफेर कर दिया है। कांग्रेस ने यहां की मुख्य सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए अपना पूरा नियंत्रण स्थापित कर लिया है।
आगे क्या होगा?
पूरे प्रदेश की बात करें तो 10 बड़े शहरों में से सिर्फ 4 में भाजपा को साफ बहुमत मिला है, जबकि बीकानेर में कांग्रेस ने अपना परचम लहराया है। बाकी जगहों पर मुकाबला त्रिकोणीय फंसा हुआ है। अब असली मुकाबला आने वाली 21 और 22 सितंबर को होगा, जब शहरों के मुख्य मुखिया (मेयर और चेयरमैन) चुनने के लिए जोड़-तोड़ और बैठकों का दौर शुरू होगा। जिन जगहों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने बाजी मारी है, वहां उनकी पूछ-परख अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई है।ली और झालावाड़ में भी स्थिति खराब

