दुशांबे में गरजे राजनाथ सिंह, पाकिस्तान के सामने आतंकवाद पर दिया दो टूक संदेश
5:38 PM, Oct 21, 2026
R Express भारत
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ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। देश के रक्षा मंत्री राजनाथ

sketch by - (AI )
ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अंतरराष्ट्रीय मंच से सीधे तौर पर पाकिस्तान को आईना दिखाया। सबसे खास बात यह रही कि जब राजनाथ सिंह आतंकवाद पर भारत का रुख साफ कर रहे थे, उस वक्त सामने पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इशाक डार भी मौजूद थे।
आतंकवाद पर 'डबल स्टैंडर्ड' बर्दाश्त नहीं
बैठक को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने साफ कहा कि आतंकवाद पूरी दुनिया की शांति, तरक्की, व्यापार और निवेश के लिए इस वक्त सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। उन्होंने दुनिया के देशों को सचेत करते हुए कहा कि इस गंभीर मुद्दे पर किसी भी तरह का 'दोहरा मापदंड' (डबल स्टैंडर्ड) नहीं चलना चाहिए। आतंकवाद को किसी भी बहाने या तर्क से सही नहीं ठहराया जा सकता।
टेरर इकोसिस्टम को खत्म करने की चुनौती
राजनाथ सिंह ने केवल आतंकवादियों पर ही नहीं, बल्कि उन्हें पालने-पोसने वालों पर भी बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का जो पूरा ढांचा (इकोसिस्टम) काम कर रहा है, उसे मिलकर उखाड़ फेंकना होगा। जो देश आतंकियों को पैसा देते हैं, उन्हें हथियार और सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराते हैं, उन्हें वैश्विक स्तर पर बेनकाब करना जरूरी है। उनका इशारा साफ तौर पर सीमा पार से होने वाली हरकतों की तरफ था।
तरक्की की राह में सबसे बड़ा रोड़ा
भारतीय रक्षा मंत्री ने बताया कि आतंकवाद सिर्फ मासूमों की जान ही नहीं लेता, बल्कि पूरे समाज को पीछे धकेल देता है। इसकी वजह से युवाओं में कट्टरता फैलती है, जिससे हमारी नई पीढ़ी को मिलने वाले अच्छे मौके छिन जाते हैं। अगर हमें दुनिया में व्यापार और आपसी संपर्क (कनेक्टिविटी) को बढ़ाना है, तो आतंकवाद को जड़ से मिटाना ही होगा।
भारत ने संयुक्त बयान पर नहीं किए दस्तखत!
इस पूरी बैठक की सबसे बड़ी इनसाइड स्टोरी यह रही कि भारत ने एससीओ के साझा घोषणापत्र (जॉइंट स्टेटमेंट) पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। खबरों के मुताबिक, घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ जैसी सख्त और साफ भाषा भारत चाहता था, वैसी नहीं थी। भारत की इस 'जीरो टॉलरेंस' नीति ने दुनिया को दिखा दिया है कि देश सुरक्षा के मामलों पर कोई समझौता नहीं करने वाला है।

