दवाओं पर डाका: देश में मरीजों से 700% तक मुनाफा वसूल रहे निजी अस्पताल
3:32 PM, Oct 23, 2026
R Express भारत
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भारत आज पूरी दुनिया में सबसे सस्ती और अच्छी जेनेरिक दवाएं सप्लाई करने के लिए जाना जाता है। इसे 'दुनिया की फार्मेसी' भी कहा जाता है। लेकिन एक कड़वा सच यह भी

sketch by - ( AI )
भारत आज पूरी दुनिया में सबसे सस्ती और अच्छी जेनेरिक दवाएं सप्लाई करने के लिए जाना जाता है। इसे 'दुनिया की फार्मेसी' भी कहा जाता है। लेकिन एक कड़वा सच यह भी है कि इसी देश के आम मरीज अस्पतालों और मेडिकल स्टोरों पर दवाओं के लिए अपनी जेबें खाली करने को मजबूर हैं। इस गंभीर मुद्दे पर अब खुद केंद्र सरकार ने देश की सबसे बड़ी अदालत के सामने एक बड़ा खुलासा किया है।
सरकार ने अदालत में माना है कि, देश के निजी अस्पताल और मेडिकल स्टोर जीवन रक्षक दवाओं और इलाज के सामानों पर मरीजों से 170% से लेकर 700% से भी ज्यादा का मुनाफा कमा रहे हैं।
मजबूरी का फायदा उठा रहे अस्पताल
अदालत को सौंपे गए दस्तावेजों में साफ कहा गया है कि जब कोई मरीज अस्पताल में भर्ती होता है, तो वह और उसका परिवार बेहद लाचार स्थिति में होते हैं। वे डॉक्टर की लिखी दवा या इंजेक्शन को बाहर से सस्ते में खरीदने या अस्पताल से मोलभाव करने की हालत में नहीं होते। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर अस्पताल उन्हें थोक भाव से कई गुना महंगी कीमतों पर दवाएं बेचते हैं।
हाल ही में उत्तर प्रदेश में हुई एक जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई थी कि जो दवाएं अस्पतालों को बेहद कम दाम में मिलती हैं, उन्हें मरीजों को 10 से 67 गुना तक महंगी करके एमआरपी पर बेचा जा रहा है। यानी जो दवा अस्पताल को 10 रुपये में मिलती है, वह मरीज को 600 रुपये से भी ज्यादा में थमा दी जाती है।
कोर्ट की फटकार और सरकार का कदम
इस अंधाधुंध मुनाफे पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने सरकार से कड़े सवाल किए हैं। कोर्ट की सख्ती के बाद सरकार ने कैंसर के इलाज में काम आने वाली कुछ जरूरी दवाओं के दामों में 70% तक की भारी कटौती की है। लेकिन अदालत इतने से संतुष्ट नहीं है। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि वह सिर्फ कैंसर ही नहीं, बल्कि सभी आम और जरूरी दवाओं पर कीमतों की एक सीमा तय करे, ताकि कोई भी अस्पताल मरीजों से मनमाना पैसा न वसूल सके।
सरकारी जांच में यह भी सामने आया है कि नियमों को ताक पर रखकर महंगी दवाएं बेचने वाली कंपनियों पर 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना और बकाया बनता है, जिसे वसूलने की प्रक्रिया चल रही है। अदालत ने अब सरकार को इस पूरी लूट को रोकने के लिए एक ठोस योजना बनाने को कहा है, जिस पर अगली सुनवाई आने वाले दिनों में होगी।

