कमजोर हुआ रुपया: डॉलर की मजबूती से बढ़ीं बाजार की मुश्किलें
3:05 PM, Sep 29, 2026
R Express भारत
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ग्लोबल मार्केट में हलचल और कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की लगातार आसमान छूती कीमतों के कारण घरेलू मुद्रा यानी भारतीय रुपये में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।

sketch by - ( chat GPT )
उत्तर प्रदेश। ग्लोबल मार्केट में हलचल और कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की लगातार आसमान छूती कीमतों के कारण घरेलू मुद्रा यानी भारतीय रुपये में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। अमेरिकी डॉलर की मजबूत स्थिति के सामने भारतीय रुपया कमजोर होकर 96 के पार चला गया है। करेंसी मार्केट के जानकारों के मुताबिक, रुपये का यह स्तर पिछले दो महीनों में सबसे निचला है। इस बड़ी गिरावट के बाद अब बाजार के निवेशकों और आम कारोबारियों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।
आखिर क्यों टूट रहा है रुपया?
रुपये की इस कमजोरी के पीछे सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दामों में आई भारी तेजी को माना जा रहा है। दरअसल, मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और भू-राजनीतिक संकट की वजह से कच्चे तेल की सप्लाई पर बुरा असर पड़ने की आशंका है। इसके चलते तेल की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी हैं। भारत अपनी जरूरत का एक बहुत बड़ा हिस्सा बाहर के देशों से तेल खरीदकर पूरा करता है। जब भी तेल महंगा होता है, तो भारत को उसका भुगतान करने के लिए ज्यादा अमेरिकी डॉलर की जरूरत पड़ती है। डॉलर की मांग अचानक बढ़ने से रुपये पर दबाव आ जाता है और वह कमजोर होने लगता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अमेरिकी बाजार का असर
तेल के अलावा एक और बड़ी वजह यह है कि अमेरिकी बाजार में निवेश पर मिलने वाला रिटर्न (यील्ड) लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका में ब्याज दरों के मजबूत होने की संभावना से विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से अपना पैसा निकालकर वापस अमेरिकी बाजारों में लगा रहे हैं। जब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक बड़े पैमाने पर भारतीय बाजार में बिकवाली करते हैं, तो वे अपनी रकम को डॉलर में बदलते हैं। इस वजह से भी रुपये की कीमत में गिरावट आ रही है।
बाजार में आगे क्या होने की उम्मीद है?
आज सुबह जब करेंसी मार्केट खुला, तो रुपया 96 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया। हालांकि, बाजार के जानकारों का कहना है कि देश का केंद्रीय बैंक रुपये को बहुत ज्यादा गिरने से बचाने के लिए बाजार में दखल दे सकता है। केंद्रीय बैंक अपने डॉलर के भंडार से कुछ डॉलर बेचकर रुपये की गिरावट को थामने की कोशिश करता है। इसके बावजूद, अगर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी नहीं आई और दुनिया भर में चल रहे तनाव शांत नहीं हुए, तो आने वाले दिनों में रुपया और भी नीचे जा सकता है। कुछ जानकारों का तो यहाँ तक मानना है कि आने वाले समय में रुपया 100 के स्तर को भी छू सकता है, जिससे बाजार का सेंटिमेंट और कमजोर हो सकता है।

