रूस का यूक्रेन पर सबसे बड़ा हमला, NATO को परमाणु चेतावनी
3:17 PM, Oct 1, 2026
R Express भारत
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रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा सैन्य संघर्ष एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। रूसी सेना ने यूक्रेन के खिलाफ इस साल का अब तक का सबसे भीषण और व्यापक

sketch by - ( AI )
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा सैन्य संघर्ष एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। रूसी सेना ने यूक्रेन के खिलाफ इस साल का अब तक का सबसे भीषण और व्यापक हवाई हमला किया है। रिपोर्टों के अनुसार, रूस ने एक साथ यूक्रेन के 11 राज्यों (ओब्लास्ट) को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। इस बड़े हमले का मुख्य उद्देश्य यूक्रेन के ऊर्जा और इंटरनेट बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से ठप करना था, जिसके चलते कई प्रांतों में बिजली और संचार व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है।
दूसरी ओर, इस सैन्य कार्रवाई के साथ ही मास्को ने पश्चिमी सैन्य गठबंधन 'नाटो' देशों को भी एक बेहद सख्त और सीधी चेतावनी जारी की है। रूस ने स्पष्ट किया है कि यदि नाटो देशों द्वारा बाल्टिक क्षेत्र में स्थित रूसी क्षेत्र 'कैलिनिनग्राद' की घेराबंदी करने या उसका रास्ता रोकने का कोई भी प्रयास किया गया, तो रूस इसका जवाब परमाणु हथियारों से दे सकता है। कैलिनिनग्राद चारों तरफ से नाटो सदस्यों से घिरा हुआ रूस का एक रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यूक्रेन में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान
यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, रूस के इस हालिया हवाई हमले में बड़े पैमाने पर क्रूज मिसाइलों, बैलिस्टिक मिसाइलों और आत्मघाती ड्रोनों का इस्तेमाल किया गया। हमले का मुख्य निशाना बिजली ग्रिड, सब-स्टेशन और इंटरनेट सप्लाई करने वाले प्रमुख हब थे। सर्दियों के मुहाने पर खड़े यूक्रेन के लिए ऊर्जा ठिकानों पर हुआ यह हमला एक बड़ा मानवीय संकट खड़ा कर सकता है। कीव और अन्य प्रमुख शहरों में आपातकालीन बिजली कटौती लागू कर दी गई है और प्रभावित इलाकों में इंटरनेट सेवाएं बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
परमाणु चेतावनी से बढ़ा वैश्विक खतरा
कैलिनिनग्राद को लेकर रूस द्वारा दी गई परमाणु चेतावनी ने वैश्विक राजनयिक हलकों में चिंता की लहर पैदा कर दी है। रूसी विदेश मंत्रालय और क्रेमलिन के रणनीतिकारों का मानना है कि नाटो द्वारा कैलिनिनग्राद की आर्थिक या भौगोलिक नाकेबंदी रूस की संप्रभुता पर सीधा हमला माना जाएगा। रूस की नई परमाणु नीति के तहत, देश की क्षेत्रीय अखंडता को खतरा होने पर परमाणु हथियारों का उपयोग किया जा सकता है।
इस बड़े घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र ने दोनों पक्षों से तनाव कम करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नाटो और रूस के बीच सीधे तौर पर कोई टकराव होता है, तो यह स्थिति तीसरे विश्व युद्ध के खतरे को जन्म दे सकती है। फिलहाल पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट है और पश्चिमी देश इस स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं।

