'समान काम, तो समान दाम क्यों नहीं?', हजरतगंज में आयुष इंटर्न डॉक्टरों का हल्ला बोल
6:13 PM, Sep 11, 2026
R Express भारत
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लखनऊ का दिल कहा जाने वाला हजरतगंज चौराहा बुधवार को पूरी तरह डॉक्टरों के नारों से गूंज उठा। अपनी मांगों को लेकर नाराज सैकड़ों की संख्या में राजकीय आयुर्वेदि

लखनऊ में डॉक्टरों का बवाल फोटो सौ0 RExpress भारत
उत्तर प्रदेश।लखनऊ का दिल कहा जाने वाला हजरतगंज चौराहा बुधवार को पूरी तरह डॉक्टरों के नारों से गूंज उठा। अपनी मांगों को लेकर नाराज सैकड़ों की संख्या में राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टर गांधी प्रतिमा पर इकट्ठा हुए और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। डॉक्टरों का साफ कहना है कि जब तक उनकी जेब और हक की लड़ाई पूरी नहीं होती, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
₹250 दिहाड़ी पर काम करने को मजबूर
प्रदर्शन कर रहे युवा डॉक्टरों का दर्द है कि उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। डॉक्टरों ने बताया कि देश के प्रधानमंत्री लगातार आयुष और आयुर्वेद को आगे बढ़ाने के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन जब जमीनी हकीकत देखी जाए तो उन्हें निराशा ही हाथ लगती है। अस्पतालों में दिन-रात मरीजों की सेवा करने के बाद भी उन्हें हर महीने सिर्फ 7,500 रुपये दिए जा रहे हैं। अगर इसका हिसाब लगाया जाए, तो यह रोजाना के हिसाब से महज 250 रुपये बैठता है, जो किसी भी कुशल मजदूर की न्यूनतम मजदूरी से भी बहुत कम है।
एमबीबीएस के बराबर मिले पैसा
डॉक्टरों की सबसे बड़ी नाराजगी इस बात को लेकर है कि मेडिकल क्षेत्र में ही उनके साथ दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले इंटर्न डॉक्टरों का वजीफा (स्टाइपेंड) 12,000 रुपये से बढ़ाकर सीधा 25,000 रुपये प्रति महीना कर दिया गया है। वहीं दूसरी तरफ, आयुर्वेदिक डॉक्टरों को सालों से उसी पुरानी रकम पर काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। डॉक्टरों का सवाल है कि जब काम और ड्यूटी का समय एक जैसा है, तो पैसे देने में यह भेदभाव क्यों?
सालों से नहीं बढ़ा एक भी रुपया
धरने पर बैठे डॉक्टरों ने याद दिलाया कि साल 2011 के बाद से उनके इस भत्ते में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं की गई है। आज के समय में जब महंगाई आसमान छू रही है, इतने कम पैसों में लखनऊ जैसे शहर में रहना और अपना खर्च चलाना नामुमकिन हो गया है। डॉक्टरों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांग मानते हुए इस रकम को बढ़ाकर 25,000 रुपये नहीं किया, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है, जिससे अस्पतालों की सेवाओं पर भी बुरा असर पड़ेगा।

