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सऊदी अरब ईशनिंदा मामला: मौत की सजा पर वैश्विक मानवाधिकार संगठनों की चिंता

6:22 PM, Oct 13, 2026

मुस्कान​ सिंह
R Express भारत

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सऊदी अरब में सोशल मीडिया पर एक विवादित टिप्पणी करने के आरोप में एक श्रीलंकाई प्रवासी कामगार को मौत की सजा सुनाए जाने का मामला सामने आया है। इस फैसले के बाद

सऊदी अरब ईशनिंदा मामला: मौत की सजा पर वैश्विक मानवाधिकार संगठनों की चिंता

sketch by - ( AI )

सऊदी अरब में सोशल मीडिया पर एक विवादित टिप्पणी करने के आरोप में एक श्रीलंकाई प्रवासी कामगार को मौत की सजा सुनाए जाने का मामला सामने आया है। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने सऊदी सरकार से सजा को तुरंत रद्द करने और आरोपी को रिहा करने की जोरदार अपील की है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 24 वर्षीय श्रीलंकाई हिंदू नागरिक अनोजन शिवरासासे जुड़ा है, जो सऊदी अरब में एक गैरेज में काम करते थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फेसबुक पर एक धार्मिक बहस के दौरान किसी अन्य यूजर ने हिंदू देवता (भगवान शिव) पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके जवाब में अनोजन ने पैगंबर मोहम्मद और इस्लाम को लेकर एक टिप्पणी पोस्ट कर दी।

हालांकि, अनोजन को तुरंत अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने वह पोस्ट डिलीट करके एक माफीनामा वीडियो भी जारी किया। लेकिन तब तक उस पोस्ट का स्क्रीनशॉट उनके नियोक्ता और सऊदी पुलिस तक पहुंच चुका था, जिसके बाद जुलाई में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

अदालत का सख्त फैसला

शुरुआत में अल-अहसा की एक आपराधिक अदालत ने अनोजन को सऊदी अरब के एंटी-साइबरक्राइम कानून के तहत दोषी ठहराया था। तब उन्हें 5 साल की जेल और 30 लाख सऊदी रियाल (लगभग 8 लाख अमेरिकी डॉलर) के भारी-भरकम जुर्माने की सजा दी गई थी।

लेकिन जब इस मामले की अपील की गई, तो पूर्वी क्षेत्र की अपीलीय अदालत ने सजा को और सख्त कर दिया। अदालत ने इस मामले को शरिया कानून के तहत 'हद' अपराध माना, जिसमें सजा को बदलकर सीधे मौत की सजा में तब्दील कर दिया गया। फिलहाल अनोजन ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अंतिम अपील दायर की है।

वैश्विक स्तर पर विरोध और अपील

इस फैसले के सामने आने के बाद एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमनिस्ट्स यूके जैसे प्रमुख मानवाधिकार संगठनों ने सऊदी अरब की कड़ी आलोचना की है। संगठनों का कहना है कि सिर्फ एक सोशल मीडिया पोस्ट या अभिव्यक्ति की आजादी के इस्तेमाल के लिए किसी को मौत की सजा देना मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है।

दूसरी ओर, श्रीलंका सरकार भी इस मामले में कूटनीतिक रास्ते तलाश रही है। श्रीलंका के छह अल्पसंख्यक सांसदों ने सऊदी विदेश मंत्री को पत्र लिखकर मानवीय आधार पर अनोजन को माफ करने का अनुरोध किया है। वहीं, अनोजन का परिवार पिछले कई हफ्तों से उनसे संपर्क न हो पाने के कारण बेहद चिंतित है और सऊदी शाह से दया की गुहार लगा रहा है।

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