Sharad Purnima 2026: आज रात बरसेगा अमृत, छत पर खीर रखना न भूलें
7:17 PM, Oct 25, 2026
R Express भारत
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देश में सनातन धर्म का प्रमुख और पवित्र त्योहार शरद पूर्णिमा बड़े ही भक्तिभाव और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की इस पूर्ण

Photo by-(chat GPT )
आज पूरे देश में सनातन धर्म का प्रमुख और पवित्र त्योहार शरद पूर्णिमा बड़े ही भक्तिभाव और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की इस पूर्णिमा का धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही दृष्टिकोण से विशेष महत्व है। इस अवसर पर देश के प्रसिद्ध मंदिरों से लेकर आम घरों तक में विशेष तैयारियां की गई हैं। मान्यता है कि इस रात को स्वयं मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और चंद्रमा की किरणों से दिव्य अमृत की वर्षा होती है।
साल में सिर्फ एक बार दिखता है चंद्रमा का यह रूपधार्मिक ग्रंथों के अनुसार, शरद पूर्णिमा वर्ष की एकमात्र ऐसी पूर्णिमा है जब चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। इस रात को 'कोजागरी पूर्णिमा' या 'रास पूर्णिमा' के नाम से भी जाना जाता है। ज्योतिषियों का मानना है कि इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है, जिससे उसकी किरणें अत्यधिक सकारात्मक ऊर्जा और औषधीय गुणों से युक्त हो जाती हैं।
खुले आसमान के नीचे खीर रखने की अनोखी परंपराशरद पूर्णिमा की सबसे प्रमुख परंपरा रात के समय खुले आसमान के नीचे गाय के दूध से बनी चावल की खीर रखना है। लोग देर रात अपनी छतों या आंगन में खीर का बर्तन रखते हैं, ताकि उस पर चंद्रमा की सीधी रोशनी पड़ सके। ऐसा माना जाता है कि चांद से बरसने वाली अमृत रूपी किरणें जब इस खीर में मिलती हैं, तो यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी बन जाती है। अगले दिन सुबह इस खीर को प्रसाद के रूप में पूरे परिवार में वितरित किया जाता है, जिससे निरोगी काया की प्राप्ति होती है।
मां लक्ष्मी का पृथ्वी पर आगमन और कोजागरी व्रतइस रात को लेकर एक और बड़ी मान्यता है कि माता लक्ष्मी यह देखने के लिए रात में धरती पर आती हैं कि कौन जाग रहा है। इसीलिए 'कोजागरा' शब्द का अर्थ होता है 'कौन जाग रहा है'। इस रात भक्तजन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं, घरों में घी के दीपक जलाए जाते हैं और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। रात्रि जागरण करने वाले भक्तों पर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है और उनके जीवन से आर्थिक तंगी दूर होती हमथुरा, वृंदावन, और काशी सहित देश के तमाम बड़े मंदिरों में आज विशेष महाआरती और भजनों का आयोजन किया गया है, जहाँ लाखों श्रद्धालु इस अलौकिक रात के साक्षी बन रहे हैं।

