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शारदीय नवरात्रि 2026: महाष्टमी और महानवमी की पूजा का अनोखा संयोग

12:40 PM, Oct 19, 2026

मुस्कान​ सिंह
R Express भारत

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शारदीय नवरात्रि 2026 में इस बार एक बेहद ही अनोखा और दुर्लभ संयोग देखने को मिल रहा है। पंचांग के हेर-फेर के कारण इस साल महाष्टमी और महानवमी की पूजा एक ही दि

शारदीय नवरात्रि 2026: महाष्टमी और महानवमी की पूजा का अनोखा संयोग

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उत्तर प्रदेश।शारदीय नवरात्रि 2026 में इस बार एक बेहद ही अनोखा और दुर्लभ संयोग देखने को मिल रहा है। पंचांग के हेर-फेर के कारण इस साल महाष्टमी और महानवमी की पूजा एक ही दिन की जा रही है। 19 अक्टूबर यानी आज सुबह से ही देश भर के घरों और पूजा पंडालों में गजब का असमंजस और उत्साह दोनों एक साथ देखने को मिल रहा है। लोग सुबह अष्टमी की पूजा करने के तुरंत बाद नवमी के अनुष्ठानों में जुट गए हैं।

क्यों बना यह दुर्लभ संयोग?

ज्योतिषियों और पंडितों के मुताबिक, इस बार तिथियों का घटना-बढ़ना इस तरह हुआ कि दोनों बड़ी तिथियां एक ही दिन आ गईं। आज यानी सोमवार सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक अष्टमी तिथि थी। इसके ठीक बाद नवमी तिथि शुरू हो गई, जो अगले दिन यानी 20 अक्टूबर की दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक चलेगी। जब भी कोई तिथि शाम से पहले बदलती है, तो शास्त्रों के अनुसार दोनों त्योहारों के पूजन का कॉम्बिनेशन एक ही दिन बैठ जाता है।

कन्या पूजन को लेकर रहा असमंजस

इस बदलाव की वजह से सुबह से ही घरों में कन्या पूजन को लेकर थोड़ी उलझन रही। हालांकि, पंडितों ने इसका साफ रास्ता निकाला कि, जिन लोगों के घर अष्टमी मनाई जाती है, उन्होंने सुबह 10:51 बजे से पहले-पहले कन्याओं को भोजन कराकर आशीर्वाद लिया। जो लोग नवमी को कन्या पूजन करते हैं, उनके लिए आज सुबह 10:51 बजे के बाद से पूरा समय शुभ है। इसके अलावा, वे कल यानी 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे से पहले भी कन्या पूजन कर सकते हैं।

हवन और व्रत पारण कब करें?

नवरात्रि के नौ दिनों का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि हवन और व्रत का पारण 20 अक्टूबर को किया जाएगा। चूंकि उदयातिथि (सूर्योदय के समय की तिथि) के नियम के हिसाब से 20 अक्टूबर को ही मुख्य नवमी मानी जा रही है, इसलिए सुबह का हवन और नौ दिनों के उपवास को खोलने का काम कल ही करना सबसे सही रहेगा।

कल मनेगा दशहरा

इस बार त्योहारों की झड़ी लगी है। 20 अक्टूबर को नवमी समाप्त होने के साथ ही दशहरा का त्योहार भी शुरू हो जाएगा। यानी कल दोपहर के बाद से लोग शस्त्र पूजा और रावण दहन जैसे पारंपरिक उत्सव मना सकेंगे। मां दुर्गा के विसर्जन और त्योहार की धूम से आज पूरा माहौल भक्तिमय बना हुआ है।

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