लखनऊ यूनिवर्सिटी में चमका शिया कॉलेज, शिखर ने रचा इतिहास
5:42 PM, Aug 1, 2026
R Express भारत
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मेधा और कड़े इम्तिहान के मैदान में जब कोई अपनी लगन से इतिहास लिखता है, तो उसकी गूंज दूर तक सुनाई देती है।

शिया कॉलेज के नाम रहे 18 स्वर्ण पदक फोटो सौ0 RExpress भारत
उत्तर प्रदेश।लखनऊ। मेधा और कड़े इम्तिहान के मैदान में जब कोई अपनी लगन से इतिहास लिखता है, तो उसकी गूंज दूर तक सुनाई देती है। लखनऊ विश्वविद्यालय के 69वें दीक्षांत समारोह के मंच पर कुछ ऐसा ही जादुई नजारा देखने को मिला। इस बार के दीक्षांत समारोह की पूरी महफिल शिया पीजी कॉलेज के होनहारों ने अपने नाम कर ली। कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने एक या दो नहीं, बल्कि पूरे 18 स्वर्ण पदकों पर कब्जा जमाकर अपनी मेधा का लोहा मनवाया है। इस शानदार कामयाबी ने शिया पीजी कॉलेज के पूरे परिसर को जश्न के माहौल में डुबो दिया है।
इस ऐतिहासिक कामयाबी के सबसे बड़े हीरो बनकर उभरे हैं एलएलबी के छात्र शिखर भारती। शिखर ने इस समारोह में अपनी असाधारण प्रतिभा के दम पर अकेले ही 9 स्वर्ण पदकों को अपनी झोली में डाल लिया। उनकी इस अद्भुत सफलता पर न सिर्फ उनके परिवार की आंखें खुशी से छलक उठीं, बल्कि पूरे कॉलेज के शिक्षकों और साथियों का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है।
लॉ और राजनीति विज्ञान के धुरंधरों का जलवा
शिया पीजी कॉलेज की इस शानदार हैट्रिक में सबसे बड़ी हिस्सेदारी कानून और राजनीति विज्ञान के विभागों की रही। इस साल कॉलेज को मिले कुल 18 स्वर्ण पदकों में से अकेले विधि विभाग के खाते में 12 मेडल आए। वहीं, राजनीति विज्ञान विभाग के धुरंधरों ने भी अपनी चमक बिखेरते हुए 6 मेडल अपने नाम किए।दीक्षांत समारोह के बड़े मंच पर जब एक के बाद एक शिया पीजी कॉलेज के छात्रों के नामों की पुकार गूंजी, तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। शिक्षकों का कहना है कि यह कामयाबी किसी एक दिन की मेहनत का नतीजा नहीं है। यह छात्रों के सालों की तपस्या, रात-रात भर जागकर की गई पढ़ाई और प्रोफेसर्स के सही मार्गदर्शन का मीठा फल है। इस कामयाबी ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही दिशा में पूरी शिद्दत से मेहनत की जाए, तो कामयाबी के आसमान को छुआ जा सकता है।
शिखर भारती: एक छात्र, 9 मेडल और एक लाख का इनाम
इस समारोह में जिसने भी पैर रखा, उसकी जुबान पर सिर्फ एक ही नाम था—शिखर भारती। एलएलबी छठे सेमेस्टर के इस होनहार छात्र ने पढ़ाई के मैदान में वो कमाल कर दिखाया, जो बरसों में कभी-कभार ही देखने को मिलता है। शिखर ने न केवल 9 मेडल अपने नाम किए, बल्कि उन्हें सबसे प्रतिष्ठित 'लेट इंद्र देव सिंह ट्रॉफी' और इसके साथ मिलने वाला चमचमाता हुआ 1 लाख रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया गया।शिखर की इस सफलता का अंदाजा आप उनके परीक्षा के अंकों से लगा सकते हैं। उन्होंने तीन साल के एलएलबी कोर्स के कुल 3600 अंकों में से 3065 अंक हासिल किए। प्रतिशत के हिसाब से देखें तो यह 85.14 फीसदी बैठता है, जो कानून की मुश्किल पढ़ाई में अपने आप में एक मिसाल है।
तना ही नहीं, जमीन से जुड़े कानूनों यानी 'लैंड लॉ' के विषय में तो शिखर ने जैसे इतिहास ही रच दिया। इस बेहद जटिल माने जाने वाले विषय में उन्होंने 200 अंकों में से पूरे 185 अंक (92.5 प्रतिशत) हासिल किए। उनके इसी शानदार प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें 'श्रीमती कौशल्या देवी निगम गोल्ड मेडल' से नवाजा गया, जो लैंड लॉ में सबसे ज्यादा नंबर लाने वाले छात्र को ही दिया जाता है।
शिखर के नाम रहे ये 9 बड़े सम्मान
बाबू महावीर प्रसाद श्रीवास्तव मेमोरियल गोल्ड मेडल: शिखर को उनकी ओवरऑल बेहतरीन परफॉर्मेंस के लिए इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया।
द्वारका प्रसाद निगम गोल्ड मेडल: कानून की बारीकियों को समझने और परीक्षा में अव्वल आने पर यह मेडल उनके नाम हुआ।
राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा गोल्ड मेडल: यह मेडल किसी भी छात्र के लिए एक सपने जैसा होता है, जो शिखर की कड़ी मेहनत को सलाम करता है।
पं. देवी सहाय मिश्र गोल्ड मेडल: अकादमिक क्षेत्र में असाधारण प्रदर्शन करने के लिए शिखर ने इस पर अपना नाम लिखवाया।
डॉ. राज कृष्ण मेमोरियल गोल्ड मेडल: कानून के क्षेत्र में उत्कृष्ट समझ और परीक्षा में टॉप करने पर यह सम्मान दिया गया।
डी.पी. बोरा मेमोरियल गोल्ड मेडल: इस मेडल को भी शिखर ने अपने ऊंचे अंकों के दम पर अपने नाम किया।
बी.के. धाओं मेमोरियल गोल्ड मेडल: मेधा सूची में सबसे ऊपर रहने की वजह से शिखर को यह पदक सौंपा गया।
कौशल्या देवी निगम गोल्ड मेडल: लैंड लॉ के कड़े इम्तिहान में 92.5% अंक लाने के जादुई रिकॉर्ड के लिए मिला।
लेट इंद्र देव सिंह ट्रॉफी, गोल्ड मेडल और कैश प्राइज: अपने पहले ही प्रयास में पूरी परीक्षा में सबसे ज्यादा नंबर हासिल करने के लिए शिखर को यह बेहद खास ट्रॉफी और 1 लाख रुपये का नकद इनाम दिया गया।
साक्षी और जान्हवी ने भी लहराया कामयाबी का परचम
इस दीक्षांत समारोह में शिया पीजी कॉलेज की बेटियों ने भी कामयाबी की नई इबारत लिखी। कॉलेज की साक्षी पाण्डेय और जान्हवी तिवारी ने अपनी मेधा से यह साबित कर दिया कि वे किसी से कम नहीं हैं।एलएलबी की छात्रा साक्षी पाण्डेय को मंच पर दो-दो बड़े सम्मानों से नवाजा गया। उन्हें 'श्री महेंद्र सिंह मेमोरियल गोल्ड मेडल' और 'एस. के. कोहली एडवोकेट मेमोरियल गोल्ड मेडल' से सम्मानित किया गया। साक्षी की इस कामयाबी ने कॉलेज के महिला विंग और उनकी सहेलियों में जोश भर दिया है।वहीं दूसरी तरफ, एलएलएम की छात्रा जान्हवी तिवारी ने उच्च शिक्षा के स्तर पर कॉलेज का मान बढ़ाया। जान्हवी को 'पंडित जगमोहन नाथ चक मेमोरियल गोल्ड मेडल' दिया गया। उन्हें यह बड़ा सम्मान देश के सबसे महत्वपूर्ण विषय यानी संवैधानिक विधि में पूरी यूनिवर्सिटी में सबसे ज्यादा अंक लाने पर मिला है। संविधान जैसे गंभीर और गहरे विषय में जान्हवी की इस पकड़ की वहां मौजूद बड़े-बड़े कानूनी दिग्गजों ने भी तारीफ की।
कॉलेज परिसर में दिवाली जैसा जश्न, गुरुओं ने थपथपाई पीठ
जैसे ही मेडल जीतकर छात्र अपने कॉलेज वापस लौटे, शिया पीजी कॉलेज का माहौल देखने लायक था। ऐसा लग रहा था जैसे कैंपस में समय से पहले ही दिवाली आ गई हो। ढोल-नगाड़ों की थाप पर छात्र झूम रहे थे और एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर बधाई दे रहे थे।
कॉलेज के प्राचार्यों और शिक्षकों ने सभी विजेता छात्रों को गले लगाकर बधाई दी और उनकी पीठ थपथपाई। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि इन 18 स्वर्ण पदकों ने शिया पीजी कॉलेज के नाम में एक नया सुनहरा पन्ना जोड़ दिया है। शिक्षकों ने कहा कि जब उनके पढ़ाए हुए बच्चे इस तरह यूनिवर्सिटी के मंच पर चमकते हैं, तो एक शिक्षक के रूप में उनका जीवन सफल हो जाता है। शिखर भारती, साक्षी पाण्डेय और जान्हवी तिवारी जैसे छात्र आने वाले नए बैच के छात्रों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा जरिया बनेंगे।
यह कामयाबी सिर्फ चंद पदकों की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन सैकड़ों उम्मीदों की उड़ान है जो हर साल छोटे-बड़े घरों से निकलकर इस कॉलेज में बड़े सपने लेकर आते हैं। शिया पीजी कॉलेज के इन सितारों ने साबित कर दिया है कि, अगर हौसलों में उड़ान हो और इरादे फौलादी हों, तो कामयाबी के हर शिखर पर आपका ही नाम होगा।

