चुनाव आयोग में मनमानी के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
1:18 PM, Oct 5, 2026
R Express भारत
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भारत के सबसे बड़े चुनाव अधिकारी यानी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इन दिनों बड़ी मुश्किलों में घिर गए हैं। चुनाव आयोग के भीतर अकेले अपने दम पर बड़े फैसल

sketch by - ( AI )
उत्तर प्रदेश।भारत के सबसे बड़े चुनाव अधिकारी यानी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इन दिनों बड़ी मुश्किलों में घिर गए हैं। चुनाव आयोग के भीतर अकेले अपने दम पर बड़े फैसले लेने के आरोपों को लेकर उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक बड़ी सुनवाई हुई है। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग से जवाब मांगा है।
क्या है पूरा मामला और क्यों मचा है बवाल?
यह पूरा विवाद पटना के रहने वाले राकेश कुमार सिंह और एक वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की अर्जी के बाद सामने आया। इन लोगों ने देश की सबसे बड़ी अदालत का दरवाजा खटखटाया और आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने आयोग के बाकी दो बड़े अधिकारियों (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) को पूरी तरह किनारे कर दिया। आरोप है कि उन्होंने मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) में सुधार और बदलाव से जुड़े करीब 14 बड़े फैसले बाकी दोनों अधिकारियों की मर्जी या जानकारी के बिना ही अकेले ले लि
कोर्ट में जजों ने क्या कहा?
इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन जजों की टीम कर रही है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ लहजे में कहा कि देश के नियमों के मुताबिक, चुनाव आयोग का कोई भी फैसला सबकी सहमति या बहुमत से होना चाहिए, न कि सिर्फ एक व्यक्ति की मर्जी से। अदालत ने यह उम्मीद जताई कि देश की इतनी बड़ी संस्था कानून के हिसाब से ही काम करेगी।
विपक्ष का सड़क पर भारी विरोध
यह मामला सिर्फ कोर्ट तक ही सीमित नहीं है। चुनाव आयोग के इस अंदरूनी झगड़े और एकतरफा फैसलों की खबर बाहर आते ही देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। मुख्य विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर और मुंबई जैसे बड़े शहरों में ज़ोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस तरह के एकतरफा बदलावों से लाखों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब हो गए हैं।
फिलहाल कोर्ट से क्या राहत मिली?
याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि जब तक इस मामले की पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक ज्ञानेश कुमार को उनके काम से रोक दिया जाए या सस्पेंड कर दिया जाए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत ऐसा कोई कदम उठाने या उन्हें पद से हटाने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सीधे तौर पर किसी को ऐसे नहीं हटाया जा सकता, लेकिन उन्होंने चुनाव आयोग को नोटिस भेजकर इन सभी गंभीर आरोपों पर उनका आधिकारिक पक्ष मांगा है। अब सबकी नजरें चुनाव आयोग के जवाब पर टिकी हैं।

