जौहर यूनिवर्सिटी को ढहाने के खिलाफ सड़कों पर उतरे स्वामी प्रसाद मौर्य, पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोका
3:38 PM, Jul 27, 2026
R Express भारत
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रामपुर की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने की मांग को लेकर देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है।

लखनऊ में बवाल फोटो सौ0 RExpress भारत
लखनऊ। रामपुर की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने की मांग को लेकर देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार को उस वक्त भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के मुखिया स्वामी प्रसाद मौर्य अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ सड़क पर उतर आए। स्वामी प्रसाद मौर्य ने यूनिवर्सिटी की इमारतों को गिराने के फैसले के विरोध में 'विधानसभा मार्च' का ऐलान किया था, लेकिन पुलिस ने बीच रास्ते में ही भारी बैरिकेडिंग करके उन्हें रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
दारुलशफा से शुरू हुआ था मार्च, आरएलडी दफ्तर के बाहर लगी रोक
तय कार्यक्रम के मुताबिक, स्वामी प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में सैकड़ों की तादाद में समर्थक और कार्यकर्ता दारुलशफा में इकट्ठा हुए थे। यहाँ से सभी लोग हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर विधानसभा की तरफ बढ़े। प्रदर्शनकारियों का इरादा विधानसभा के सामने जाकर अपनी मांगों को बुलंद करना था। लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पहले से ही कड़े इंतजाम कर रखे थे।
जैसे ही यह मार्च विधानसभा मार्ग पर स्थित राष्ट्रीय लोक दल कार्यालय के पास पहुँचा, वहाँ तैनात भारी पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों का रास्ता रोक लिया। पुलिस ने लोहे की मजबूत बैरिकेडिंग कर रखी थी। कार्यकर्ताओं ने आगे बढ़ने की कोशिश की, जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी देर तक तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी हुई। जब पुलिस ने किसी भी कीमत पर आगे नहीं जाने दिया, तो स्वामी प्रसाद मौर्य अपने समर्थकों के साथ वहीं सड़क पर बैठ गए।
'शिक्षण संस्थानों को निशाना बना रही है सरकार' - स्वामी प्रसाद मौर्य
धरने पर बैठे पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने प्रदेश सरकार पर चौतरफा हमला बोला। उन्होंने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार एक सोची-समझी रणनीति के तहत काम कर रही है। देश और प्रदेश के स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।
मौर्य ने कहा, "जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ जो भी एक्शन लिया जा रहा है, वह सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। शिक्षा के मंदिर को राजनीति का अखाड़ा बनाया जा रहा है और दंडात्मक कार्रवाई के नाम पर इसे बर्बाद करने की साजिश रची जा रही है। इस खींचतान में वहाँ पढ़ रहे हजारों छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है, जिसे हम बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे।" उन्होंने मांग की है कि यूनिवर्सिटी की इमारतों को गिराने का जो भी निर्देश दिया गया है, उसे तुरंत वापस लिया जाए।
इस पूरे विवाद की जड़ें रामपुर विकास प्राधिकरण के एक हालिया फैसले से जुड़ी हैं। प्राधिकरण का दावा है कि जौहर यूनिवर्सिटी कैंपस के भीतर बनी करीब 40 इमारतों में से 38 इमारतें बिना पास नक्शे के खड़ी कर दी गई हैं। इसी को आधार बनाकर इन इमारतों को अवैध बताते हुए इन्हें गिराने का नोटिस जारी किया गया था। इस कार्रवाई को समाजवादी पार्टी और विपक्षी खेमा एकतरफा बता रहा है।
लखनऊ में हुए इस ताजा प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में जौहर यूनिवर्सिटी का मुद्दा यूपी की राजनीति में और ज्यादा तूल पकड़ने वाला है।

