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मड़ियांव में स्विगी डिलीवरी बॉय और विभूति खंड में पेंटर की मौत, हर आंख नम

5:19 PM, Jul 27, 2026

मुस्कान​ सिंह
R Express भारत

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लखनऊ से दिल को दहला देने वाली दो अलग-अलग खबरें सामने आई हैं। मड़ियांव और विभूति खंड इलाके में दो युवाओं की जान चली गई। इन दोनों ही हादसों के बाद से पीड़ित

 मड़ियांव में स्विगी डिलीवरी बॉय और विभूति खंड में पेंटर की मौत, हर आंख नम

तौहिद अहमद की फोटो सौ0 RExpress भारत

लखनऊ से दिल को दहला देने वाली दो अलग-अलग खबरें सामने आई हैं। मड़ियांव और विभूति खंड इलाके में दो युवाओं की जान चली गई। इन दोनों ही हादसों के बाद से पीड़ित परिवारों में चीख-पुकार मची हुई है। हंसते-खेलते घरों की खुशियां पल भर में मातम में बदल गईं। दोनों मामलों की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आस-पास के लोगों से बातचीत कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

पहली घटना: मड़ियांव में इकलौते भाई ने दुनिया को कहा अलविदा

पहली दुखद घटना मड़ियांव की श्रीनगर कॉलोनी की है। यहाँ रहने वाले 22 साल के तौहीद अहमद की अचानक हुई मौत से पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है। तौहीद के मामा सिराज ने बताया कि उनका भांजा एक जाने-माने ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप में डिलीवरी बॉय का काम करता था। रविवार की देर रात वह अपनी रोज़मर्रा की ड्यूटी खत्म करके थका-हारा घर लौटा था। रात में उसने परिवार के साथ सामान्य रूप से खाना खाया और सोने के लिए ऊपर अपने कमरे में चला गया।

सोमवार की सुबह जब उसकी मां रुबीना उसे रोज़ की तरह जगाने के लिए ऊपर कमरे में गईं, तो अंदर का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। तौहीद कमरे में टीन शेड के नीचे लगे पंखे से दुपट्टे के सहारे लटका हुआ था। मां की रोने-चीखने की आवाज़ सुनकर तौहीद की बहन सादमा और पड़ोस के लोग भी दौड़कर अंदर पहुंचे। आस-पास के लोगों ने हिम्मत दिखाकर उसे तुरंत नीचे उतारा और आनन-फानन में इलाज के लिए ट्रामा सेंटर लेकर भागे। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी, डॉक्टरों ने उसे देखते ही मृत घोषित कर दिया।

तौहीद अपने माता-पिता का इकलौता बेटा और दो बहनों के बीच अकेला भाई था। उसके पिता रफी बिहार में रहकर फर्नीचर बनाने का काम करते हैं। मामा ने रोते हुए बताया कि घर में कमाई बहुत कम थी, जिसकी वजह से रोज का खर्च चलाना भारी पड़ रहा था। इसी आर्थिक तंगी के कारण तौहीद पिछले कई दिनों से गहरे डिप्रेशन में चल रहा था। इकलौते कमाऊ बेटे की मौत के बाद से मां और बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

दूसरी घटना: विभूति खंड में उजड़ा एक हंसता-खेलता परिवार

ठीक ऐसी ही एक और दर्दनाक घटना विभूति खंड के विजयीपुर विशेष खंड से सामने आई। यहाँ मूल रूप से बाराबंकी के बड्डूपुर का रहने वाला 25 साल का सुशील कनौजिया अपनी पत्नी माधुरी और नन्ही बेटी पलक के साथ किराए का कमरा लेकर रहता था। सुशील घरों में पुताई का काम करके अपने परिवार का पेट पालता था।

उसकी पत्नी माधुरी ने बताया कि रविवार की रात सुशील काफी नशे की हालत में घर लौटा था। इसके बाद सबने खाना-पीना खाया और तीनों एक साथ कमरे में सो गए। देर रात करीब 2 बजे जब माधुरी की अचानक आंख खुली, तो कमरे का दृश्य देखकर उसकी चीख निकल गई। सुशील ने साड़ी के टुकड़े को टीन शेड के बीच लगे लोहे के एंगल से बांधकर फंदा बना लिया था और उस पर लटका हुआ था।

घबराई पत्नी ने तुरंत शोर मचाकर आस-पड़ोस के लोगों को इकट्ठा किया। मकान मालिक और पड़ोसियों की मदद से सुशील को फंदे से नीचे उतारा गया और तुरंत राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। सुशील की मौत के बाद से उसकी पत्नी और मासूम बच्ची का रो-रोकर बुरा हाल है।

इन दोनों ही घटनाओं ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। कमाई की चिंता और मानसिक तनाव आज के युवाओं को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है, जिसके कारण ऐसे दुखद कदम सामने आ रहे हैं।

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