तनाव चरम पर: ट्रंप की 'Blow Up' की धमकी के बाद ईरान बोला- 'युद्ध को तैयार'
3:24 PM, Oct 1, 2026
R Express भारत
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अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 'पूरी तरह उड़ा देने' की खुली चेतावनी दी है।

sketch by - ( AI )
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 'पूरी तरह उड़ा देने' की खुली चेतावनी दी है। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन के सामने अब दो ही रास्ते बचे हैं—या तो वे ईरान के साथ कोई समझौता करें या फिर उसे पूरी तरह तबाह कर दें। उन्होंने बेहद कड़े लहजे में कहा, "हमें यह फैसला करना ही होगा: हम उन्हें उड़ा दें या फिर कोई डील करें"। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक बातचीत पूरी तरह ठप नजर आ रही है।
ईरान का पलटवार: कूटनीतिक विकल्प खुले, लेकिन युद्ध के लिए भी तैयार
दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी इस पर बेहद सख्त प्रतिक्रिया दी है। अराघची का कहना है कि तेहरान किसी भी परिस्थिति से निपटने और युद्ध के मैदान में उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान ने कूटनीति के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं किए हैं। ईरान की ओर से यह बयान तब आया जब हाल ही में न्यूयॉर्क में चल रही बातचीत के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को वापस जाने का आदेश दे दिया था। फिलहाल, कतर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिशों में जुटा हुआ है।
तनाव के मुख्य कारण और वैश्विक प्रभाव
इस भीषण तनाव का सबसे बड़ा केंद्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज'बना हुआ है। इस जलमार्ग से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात करता है। ईरान ने इस मार्ग पर वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को प्रभावित करने का प्रयास किया है, जिसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की सख्त नाकेबंदी कर दी है। अमेरिका द्वारा लगाए गए नए आर्थिक प्रतिबंधों और नाकेबंदी के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव है।
क्या टल सकता है संकट?
डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे स्थिति को बहुत जल्द एक अंजाम तक पहुंचाना चाहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच यदि जल्द ही कतर या अन्य मध्यस्थों के जरिए कोई सहमति नहीं बनी, तो पश्चिम एशिया में एक बड़ा सैन्य संकट खड़ा हो सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतें बुरी तरह प्रभावित होंगी।

