मेटा पर लगा अब तक का सबसे बड़ा 25 बिलियन डॉलर का जुर्माना, जानें क्या है पूरा मामला ?
4:13 PM, Oct 22, 2026
R Express भारत
Share:
सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी मेटा को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। अमेरिका के न्यू मेक्सिको की एक अदालत ने फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा पर 25 बिलियन डॉलर

photo by - ( chat GPT )
सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी मेटा को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। अमेरिका के न्यू मेक्सिको की एक अदालत ने फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा पर 25 बिलियन डॉलर (करीब 2.1 लाख करोड़ रुपये) का ऐतिहासिक जुर्माना ठोक दिया है। यह दुनिया के इतिहास में डेटा प्राइवेसी के उल्लंघन पर लगा अब तक का सबसे भारी-भरकम जुर्माना है।
अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि कंपनी ने अपने यूजर्स के निजी डेटा की सुरक्षा को लेकर झूठ बोला और लोगों को धोखे में रखा। जज फ्रांसिस मैथ्यू ने फैसला सुनाते हुए कहा कि कंपनी का मैनेजमेंट इस बात से अच्छी तरह वाकिफ था कि डेटा लीक हो रहा है, फिर भी जनता से सच छिपाया गया।
क्या है यह पूरा विवाद?
इस पूरे विवाद की जड़ें साल 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव और कुख्यात कैंब्रिज एनालिटिका घोटाले से जुड़ी हैं। उस वक्त एक थर्ड-पार्टी क्विज़ ऐप के जरिए लगभग 8.7 करोड़ फेसबुक यूजर्स की पर्सनल जानकारी चोरी की गई थी। इस डेटा का इस्तेमाल चुनाव को प्रभावित करने के लिए किया गया। कोर्ट में पेश हुए सबूतों से सामने आया कि कंपनी के मालिक मार्क जकरबर्ग और पूर्व अधिकारी शेरिल सैंडबर्ग को इस डेटा लीक की पूरी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने इसे दबाए रखा।
219 बिलियन डॉलर से घटकर 25 बिलियन हुआ जुर्माना
न्यू मेक्सिको राज्य के नियमों के मुताबिक, फेसबुक ने प्राइवेसी के नियमों को 4.3 करोड़ से ज्यादा बार तोड़ा था। इस हिसाब से कानूनन यह जुर्माना 219 बिलियन डॉलर तक पहुंच रहा था। सरकारी वकीलों ने 40 बिलियन डॉलर की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने सभी पक्षों को देखते हुए इसे 25 बिलियन डॉलर तय किया। यह रकम इतनी बड़ी है कि मेटा कंपनी एक तिमाही (तीन महीने) में जितना कमाती है, यह पूरा मुनाफा साफ कर देगी।
मेटा का क्या कहना है?
इस फैसले के बाद मेटा कंपनी में हड़कंप मच गया है। कंपनी के लीगल हेड सी.जे. महोनी ने अदालत के इस कदम पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि इतने भारी जुर्माने के बाद न्यू मेक्सिको जैसे राज्यों में बिजनेस चलाना नामुमकिन हो जाएगा। मेटा ने साफ कर दिया है कि वह इस फैसले को स्वीकार नहीं करेगी और इसके खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील दर्ज करेगी। अगर कंपनी अपील हारती है और समय पर पैसे नहीं देती, तो जुर्माने की रकम पर हर साल 15% का ब्याज भी लगेगा।

