अमीनाबाद के रास्ते मरीजों की नसों में उतरने वाली थी मौत की खुराक, पुलिस ने सप्लायर दबोचा
6:10 PM, Jul 17, 2026
R Express भारत
Share:
अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य गंभीर बीमारी से जूझ रहा है और आप सस्ती दवाओं या भारी डिस्काउंट के लालच में लखनऊ के अमीनाबाद दवा बाजार जाने की सोच रहे है

बीकेटी में बड़ी खेप बरामद फोटो सौ0 RExpress भारत
लखनऊ।बख्शी का तालाब।अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य गंभीर बीमारी से जूझ रहा है और आप सस्ती दवाओं या भारी डिस्काउंट के लालच में लखनऊ के अमीनाबाद दवा बाजार जाने की सोच रहे हैं, तो रुकिए! यह बाजार इस समय नकली दवाओं के सिंडिकेट के निशाने पर है। बख्शी का तालाब इलाके में पुलिस और ड्रग विभाग द्वारा पकड़ी गई दवाओं की बड़ी खेप ने यह साफ कर दिया है कि, ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर अमीनाबाद की थोक और फुटकर मंडियों में मौत का सामान खपाने की बड़ी साजिश चल रही थी।
हैरान करने वाली बात यह है कि जो 2,157 बोतलें पकड़ी गई हैं, उनमें पेट की गैस, एसिडिटी और लिवर-खून से जुड़ी आम दवाएं जैसे रुबीरेड , अल्कासोल और म्यूकेन शामिल थीं। ये वो दवाएं हैं जिन्हें डॉक्टर हर दूसरे मरीज को लिखते हैं और लोग बिना ज्यादा सोचे मेडिकल स्टोर से खरीद लेते हैं। पकड़े गए सप्लायर भूपेन्द्र सिंह ने कुबूल किया है कि, वह इस माल को अमीनाबाद के ही कुछ चुनिंदा ठिकानों पर सप्लाई करने जा रहा था।
चमकदार पैकेट के पीछे का सच
नकली दवा बनाने वाले माफिया जानते हैं कि, आम इंसान कभी भी दवा की बोतल के ढक्कन या प्रिंटिंग को बारीक नजर से नहीं देखता। बीकेटी में पकड़े गए माल की जांच में सामने आया कि, इन बोतलों पर जो लोगो और स्टिकर लगे थे, वे हूबहू असली जैसे दिखते थे। लेकिन जब ड्रग इंस्पेक्टरों ने इन्हें असली बोतलों के बगल में रखकर देखा, तो इनकी छपाई धुंधली थी और ढक्कन की सील बेहद कमजोर थी। यानी फैक्टरी में किसी भी घटिया लिक्विड या केमिकल को मिलाकर यह सीरप तैयार किया गया और ऊपर से नामी कंपनियों का ठप्पा लगा दिया गया।
मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़
विशेषज्ञों का कहना है कि, नकली सीरप और गोलियां खाने से मरीज की बीमारी तो ठीक नहीं होती, बल्कि उल्टा उसके लिवर, किडनी और आंतों पर इसका बेहद जानलेवा असर पड़ता है। कई बार इन दवाओं में केवल मीठा पानी या चॉक पाउडर होता है, जिससे मरीज को समय पर सही इलाज नहीं मिल पाता और उसकी हालत बिगड़ जाती है।
अक्सर अमीनाबाद में कुछ दुकानदार 'बिना जीएसटी' या 'बिना बिल' के दवा देने पर ज्यादा डिस्काउंट का लालच देते हैं। याद रखें, बिना बिल की दवा नकली होने का चांस 90% ज्यादा होता है। हमेशा पक्का कैश मेमो लें, जिस पर दवा का बैच नंबर और एक्सपायरी डेट साफ लिखी हो।नकली दवाओं के रैपर पर अक्सर कंपनी के नाम की स्पेलिंग में छोटा-मोटा हेरफेर होता है। इसके अलावा बोतल की सील, प्रिंटिंग का धुंधलापन और क्यूआर कोड को जरूर चेक करें।आजकल ज्यादातर बड़ी कंपनियां अपनी दवाओं पर एक विशेष बारकोड या क्यूआर कोड देती हैं। इसे मोबाइल से स्कैन करके आप तुरंत जान सकते हैं कि दवा असली है या नहीं।
अगर कोई दवा बाजार के तय रेट से बहुत ज्यादा सस्ती (जैसे 50% से 70% छूट पर) मिल रही है, तो लालच में न आएं। नामी कंपनियां इतना भारी डिस्काउंट सीधे फुटकर ग्राहकों को कभी नहीं देतीं।

