चुनाव आयोग के अंदरूनी झगड़े पर मचा भारी बवाल, विपक्ष ने की चीफ को हटाने की मांग
4:08 PM, Sep 24, 2026
R Express भारत
Share:
देश की सबसे बड़ी चुनावी संस्था के भीतर से आ रही आपसी खींचतान की खबरों ने देश की राजनीति में एक बड़ा भूचाल ला दिया है। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया

sketch by - ( AI )
उत्तर प्रदेश। देश की सबसे बड़ी चुनावी संस्था के भीतर से आ रही आपसी खींचतान की खबरों ने देश की राजनीति में एक बड़ा भूचाल ला दिया है। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संस्था को चलाने वाले शीर्ष अधिकारियों के बीच पिछले कुछ महीनों से बड़े पैमाने पर मतभेद चल रहे हैं। इस खुलासे के बाद से ही विपक्षी दल पूरी तरह हमलावर हो गए हैं और उन्होंने संस्था के मुख्य मुखिया (चीफ) को तुरंत पद से हटाने की मांग शुरू कर दी है।
अंदरूनी चिट्ठियों से खुला मतभेदों का राज
सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीन सदस्यीय इस शीर्ष संस्था के दो अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्य मुखिया के काम करने के तौर-तरीकों पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। बताया जा रहा है कि पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 ऐसे मौके आए, जब दोनों अधिकारियों ने मुख्य मुखिया के फैसलों पर लिखित रूप में अपनी असहमति दर्ज कराई।
विवाद का मुख्य कारण वोटर लिस्ट में सुधार करने और नए वोटरों के नाम जोड़ने या पुराने नाम हटाने के अभियान से जुड़ा है। आरोप है कि दोनों सहयोगियों को भरोसे में लिए बिना और उनकी सहमति के बिना ही कई बड़े नीतिगत फैसले लागू कर दिए गए।
इस आंतरिक विवाद के सामने आते ही विपक्षी खेमे में भारी उबाल है। कांग्रेस समेत तमाम बड़े विपक्षी नेताओं ने इसे लोकतंत्र और जनता के अधिकारों पर सीधा हमला बताया है। कुछ बड़े क्षेत्रीय नेताओं ने तो मुख्य मुखिया के इस्तीफे और उनकी गिरफ्तारी तक की मांग कर डाली है। विपक्ष का आरोप है कि इस आंतरिक मनमानी के कारण हालिया चुनावों में लाखों असली वोटरों के नाम लिस्ट से कट गए, जिससे चुनावी नतीजों पर सीधा असर पड़ा। विपक्ष अब उन राज्यों में दोबारा चुनाव कराने के लिए दबाव बना रहा है।
संस्था का बचाव और कानूनी लड़ाई
दूसरी तरफ, विवाद बढ़ने पर संस्था ने अपनी सफाई जारी की है। उनका कहना है कि किसी भी बड़े संगठन के भीतर अलग-अलग राय होना और सुझाव देना एक सामान्य प्रक्रिया है। संस्था के मुताबिक, सभी अंतिम फैसले आपसी सहमति से ही लिए गए थे। वहीं, सत्तारूढ़ दल के नेताओं का कहना है कि विपक्ष अपनी चुनावी हार का ठीकरा इस संस्था पर फोड़ रहा है।
यह मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के दरवाजे पर भी पहुंच चुका है, जहां इस पूरे विवाद को लेकर याचिकाएं दायर की गई हैं। अदालत में यह मांग की जा रही है कि संस्था के भीतर सामूहिक रूप से फैसले लेने के नियमों का उल्लंघन हुआ है, इसलिए इस पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।त्तर प्रदेश।

