फर्जी फास्टैग से टोल को 'चूना' लगाने वाले दो सगे भाई एसटीएफ के हत्थे चढ़े
1:49 PM, Jul 24, 2026
R Express भारत
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उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स एक ऐसे शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है जो राष्ट्रीय राजमार्गों पर फर्जी फास्टैग के सहारे सरकार को लाखों-करोड़ों की चपत

ठगी करने वाला आरोपी फोटो— सौ0 RExpress भारत
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स एक ऐसे शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है जो राष्ट्रीय राजमार्गों पर फर्जी फास्टैग के सहारे सरकार को लाखों-करोड़ों की चपत लगा रहा था। एसटीएफ की टीम ने लखनऊ के पॉलिटेक्निक चौराहे के पास घेराबंदी करके इस जालसाजी के पीछे दिमाग लगाने वाले दो मुख्य आरोपियों को दबोच लिया है। पकड़े गए दोनों आरोपी आपस में सगे भाई हैं और मूल रूप से सीतापुर जिले के रहने वाले हैं।
पहचान और मौके से मिला सामान
गिरफ्तार किए गए सगे भाइयों के नाम अनंत राम राठौर और नकीब खान हैं, जो सीतापुर के खैराबाद इलाके के निवासी हैं। एसटीएफ की टीम ने जब इनकी तलाशी ली, तो इनके पास से दो स्मार्टफोन, दो पैन कार्ड और कुछ नकदी बरामद हुई। शुरुआती जांच में पता चला है कि यह गिरोह लंबे समय से हाइवे पर टोल टैक्स की चोरी का एक समानांतर नेटवर्क चला रहा था।
बैंक पोर्टल में सेंध लगाकर ऐसे करते थे खेल
पूछताछ में इन जालसाजों ने अपना पूरा खेल उगल दिया है। आरोपियों ने बताया कि वे इंडसइंड बैंक के फास्टैग पोर्टल की खामियों का फायदा उठाते थे। ये लोग किसी भी रैंडम या फर्जी गाड़ी के नंबर और जाली कागजात तैयार करके बैंक के पोर्टल पर अपलोड कर देते थे। वहां से अप्रूवल मिलते ही फर्जी नंबरों पर धड़ाधड़ फास्टैग एक्टिवेट हो जाते थे।
इन अवैध फास्टैग को उन गाड़ियों पर लगा दिया जाता था, जिन्हें टोल टैक्स नहीं देना होता था या जो भारी वाहन होते थे। नतीजा यह होता था कि गाड़ियां टोल प्लाजा से बिना पूरा भुगतान किए या बेहद कम पैसे में सरपट निकल जाती थीं। इस चालबाज़ी से न सिर्फ टोल कंपनियों को घाटा हो रहा था, बल्कि सड़कों पर दौड़ने वाली गाड़ियों के ऑनलाइन चालान भी गलत नंबरों पर चले जाते थे, जिससे असली गाड़ी मालिक परेशान होते थे।
एसटीएफ के अधिकारियों के मुताबिक, इस रैकेट की वजह से सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा है। पकड़े गए दोनों भाइयों से लगातार पूछताछ की जा रही है क्योंकि पुलिस को शक है कि इस खेल में बैंक के कुछ अंदरूनी लोग या एजेंट भी शामिल हो सकते हैं। इसके साथ ही, सीतापुर और आस-पास के उन गाड़ी मालिकों की भी लिस्ट तैयार की जा रही है जो इनसे सस्ते में फर्जी फास्टैग खरीदकर इस्तेमाल कर रहे थे। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस गिरोह के बाकी सदस्यों को भी जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

