U23 कुश्ती: बेहद करीबी मुकाबले में चूका गोल्ड, विश्वजीत को मिला सिल्वर
4:13 PM, Oct 16, 2026
R Express भारत
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अमेरिका की चमचमाती नगरी लास वेगास में चल रही अंडर-23 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप 2026 से भारत के लिए एक बेहद शानदार और एतिहासिक खबर सामने आई है।

sketch by - ( AI )
उत्तर प्रदेश।अमेरिका की चमचमाती नगरी लास वेगास में चल रही अंडर-23 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप 2026 से भारत के लिए एक बेहद शानदार और एतिहासिक खबर सामने आई है। भारत के युवा और होनहार पहलवान विश्वजीत रामचंद्र मोरे ने मैट पर ऐसा दमखम दिखाया कि इतिहास के पन्नों में अपना नाम हमेशा के लिए दर्ज करा लिया। विश्वजीत ने पुरुषों के 55 किलोग्राम ग्रीको-रोमन वर्ग में देश को चांदी का तमगा (रजत पदक) दिलाया है। इस टूर्नामेंट के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी भारतीय खिलाड़ी ने ग्रीको-रोमन के फाइनल में जगह बनाकर सिल्वर मेडल पर कब्जा किया हो।
रोमांच की पराकाष्ठा पर पहुंचा फाइनल मुकाबला
गुरुवार को खेला गया खिताबी मुकाबला सांसें रोक देने वाला था। फाइनल में विश्वजीत का सामना जॉर्जिया के खतरनाक पहलवान कोबा कारुमिद्जे से हुआ। दोनों ही पहलवानों ने एक-दूसरे को चित करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। पूरे मैच के दौरान अंक ऊपर-नीचे होते रहे और अंत तक यह अंदाजा लगाना मुश्किल था कि बाजी कौन मारेगा। हालांकि, आखिरी कुछ सेकंड्स में किस्मत ने जॉर्जियाई खिलाड़ी का साथ दिया और विश्वजीत बेहद करीबी अंतर से 12-13 से यह मैच हार गए। भले ही वह गोल्ड मेडल से चूक गए हों, लेकिन उन्होंने अपनी फाइटिंग स्पिरिट से दुनिया भर के कुश्ती प्रेमियों का दिल जीत लिया।
चैंपियनशिप में पदकों की अनोखी हैट्रिक
महाराष्ट्र के कोल्हापुर के रहने वाले विश्वजीत मोरे के लिए यह सफर आसान नहीं था। फाइनल की राह में उन्होंने दुनिया के दिग्गज पहलवानों को धूल चटाई। उन्होंने मैक्सिको के खिलाड़ी को हराने के बाद क्वार्टर फाइनल में ईरान के अंडर-20 वर्ल्ड चैंपियन आर्मिन शम्सीपुर को 8-1 से एकतरफा पटखनी दी। इसके बाद सेमीफाइनल में रूस के मलिक गिगीएव को 7-4 से मात देकर फाइनल का टिकट कटाया था। इस सिल्वर मेडल के साथ ही विश्वजीत इस बड़ी चैंपियनशिप में लगातार तीन पदक जीतने वाले देश के इकलौते ग्रीको-रोमन पहलवान बन गए हैं। इससे पहले वे 2024 और 2025 में लगातार दो बार ब्रॉन्ज मेडल (कांस्य पदक) अपने नाम कर चुके हैं।
तंगहाली को मात देकर रचा इतिहास
एक साधारण सब्जी विक्रेता के घर पैदा हुए विश्वजीत की यह कामयाबी करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा है। आर्थिक तंगहाली और सुविधाओं की कमी के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। हालांकि, इस टूर्नामेंट में भारतीय खेमे के लिए एक बुरी खबर भी रही। वीजा से जुड़ी परेशानियों के चलते भारत की ग्रीको-रोमन और महिला टीम के 9 मुख्य पहलवान अमेरिका नहीं पहुंच सके। अगर वे सभी भी इस प्रतियोगिता का हिस्सा होते, तो भारत की झोली में कुछ और पदक आ सकते थे। बहरहाल, विश्वजीत मोरे की इस ऐतिहासिक जीत ने भारतीय कुश्ती को दुनिया के नक्शे पर एक नया मुकाम दे दिया है।

