UP Govt Jobs: अब पुलिस वेरिफिकेशन से पहले मिलेगी प्रोविजनल जॉइनिंग
1:42 PM, Oct 29, 2026
R Express भारत
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योगी सरकार ने सीधी भर्तियों के लिए एक नई नीति को मंजूरी दे दी है। इस नए नियम के आने से अब नौकरी की रेस में पास होने वाले युवाओं को जॉइनिंग के लिए महीनों क

sketch by - ( AI )
उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ी और काम की खबर है। योगी सरकार ने सीधी भर्तियों के लिए एक नई नीति को मंजूरी दे दी है। इस नए नियम के आने से अब नौकरी की रेस में पास होने वाले युवाओं को जॉइनिंग के लिए महीनों का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सरकार ने साफ किया है कि अब सिर्फ पुलिस वेरिफिकेशन या कैरेक्टर सर्टिफिकेट के लटके होने की वजह से किसी भी कैंडिडेट की नौकरी नहीं रोकी जाएगी।
रिफिकेशन से पहले मिलेगी प्रोविजनल जॉइनिंग
पुराने नियमों के मुताबिक, लिखित परीक्षा और इंटरव्यू पास करने के बाद भी जब तक पुलिस कैंडिडेट के घर जाकर उसका वेरिफिकेशन पूरा नहीं कर लेती थी, तब तक जॉइनिंग लेटर नहीं मिलता था। इस प्रक्रिया में कई बार महीनों का समय लग जाता था। लेकिन नई नीति के तहत, अब कैंडिडेट से एक सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म भरवाया जाएगा। इसके आधार पर कैंडिडेट को 'प्रोविजनल' यानी अस्थायी जॉइनिंग दे दी जाएगी और वे काम शुरू कर सकेंगे। हालांकि, बाद में अगर पुलिस जांच में कोई गड़बड़ी या गलत जानकारी पाई गई, तो नौकरी तुरंत खत्म कर दी जाएगी और कानूनी एक्शन भी लिया जाएगा।
इन लोगों को सरकारी नौकरी से किया जाएगा सीधे बाहर
नई नीति में जहां ईमानदार युवाओं को राहत दी गई है, वहीं आपराधिक छवि वाले लोगों के लिए रास्ते पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं। अगर कोई कैंडिडेट निम्नलिखित मामलों में शामिल पाया जाता है, तो उसे नौकरी के लिए पूरी तरह अयोग्य मान लिया जाएगा।
हिंसा के दम पर सरकार या व्यवस्था को बदलने की कोशिशों या साजिशों में शामिल लोगों को नौकरी नहीं मिलेगी।भ्रष्टाचार, पेपर लीक करने वाले गैंग या परीक्षा में सॉल्वर बैठाने जैसे गंभीर मामलों में फंसे युवाओं को सीधे बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।जो पद देश या राज्य की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं, वहां बिना पूरी पुलिस जांच के किसी को भी प्रोविजनल जॉइनिंग नहीं दी जाएगी।
FIR दर्ज होने मात्र से नहीं जाएगी नौकरी
युवाओं को राहत देते हुए सरकार ने यह भी साफ किया है कि सिर्फ किसी राजनीतिक आंदोलन से जुड़े होने या किसी मामले में केवल FIR दर्ज होने मात्र से कैंडिडेट को अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा। अगर कैंडिडेट कोर्ट से बाइज्जत बरी हो चुका है, या आपसी समझौते से मामला सुलझ गया है, तो उसकी नौकरी पर कोई आंच नहीं आएगी।
पुलिस को 30 दिन में देनी होगी रिपोर्ट
इस पूरी व्यवस्था को रफ्तार देने के लिए पुलिस और लोकल इंटेलिजेंस पर भी नकेल कसी गई है। अब पुलिस को हर हाल में 30 दिनों के भीतर अपनी वेरिफिकेशन रिपोर्ट विभाग को सौंपनी होगी। यह जांच कैंडिडेट के अपने गृह जिले के साथ-साथ उन सभी जगहों से भी होगी, जहां वह पिछले 5 सालों में 1 साल से ज्यादा समय तक रहा है।

