UP Panchayat Election: दोहरी वोटर लिस्ट का खेल खत्म, नया नियम लागू
2:06 PM, Oct 29, 2026
R Express भारत
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उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में फर्जी वोटिंग और दोहरी मतदाता सूची के जरिए होने वाले चुनावी खेल को खत्म करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फै

sketch by - ( AI )
उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में फर्जी वोटिंग और दोहरी मतदाता सूची के जरिए होने वाले चुनावी खेल को खत्म करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मतदाता सूची से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव को मंजूरी दे दी गई है। नए नियमों के मुताबिक, अब यूपी की किसी भी ग्राम पंचायत की वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए नागरिक को वहां कम से कम 6 महीने से रहना अनिवार्य होगा।
क्या है नया नियम और 'सामान्य निवासी' की परिभाषा?
सरकार ने उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा-9 में संशोधन करते हुए "उत्तर प्रदेश पंचायत राज नियमावली, 2026" को हरी झंडी दी है। इससे पहले अधिनियम में 'मामूली तौर से निवासी' शब्द का इस्तेमाल होता था, जिसकी कोई स्पष्ट समय-सीमा तय नहीं थी। इस ढीले नियम का फायदा उठाकर कई लोग शहरों या अन्य कस्बों में रहने के बावजूद गांवों की वोटर लिस्ट में अपना नाम बनाए रखते थे। अब 'सामान्य निवासी' की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए न्यूनतम 6 महीने की अवधि को कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर हुआ बदलाव
यह महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश और निर्देशों के बाद अमली जामा पहनाया गया है। दरअसल, हर पंचायत चुनाव के दौरान दो जगहों पर नाम होने और फर्जी वोटरों को लेकर हजारों आपत्तियां और अदालती मुकदमे दर्ज होते थे। नए नियम से मतदाता सूची से जुड़े विवादों और मुकदमों में भारी कमी आने की उम्मीद है।
वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए क्या करना होगा?
यदि कोई नागरिक किसी नई ग्राम पंचायत में 6 महीने से रह रहा है और वहां का वोटर बनना चाहता है, तो उसे अपने पुराने निवास स्थान की मतदाता सूची से नाम कटवाने का प्रमाण देना होगा।नए आवेदकों को गांव में 6 महीने से निवास करने के प्रमाण के रूप में आधार कार्ड, बिजली का बिल, पानी का बिल या टेलीफोन बिल जैसे वैध सरकारी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
स्थानीय प्रशासन को मिलेगी मजबूती
इस नई व्यवस्था के लागू होने से स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों और बीएलओ को मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान दावों और आपत्तियों का निपटारा करने में कानूनी स्पष्टता मिलेगी। अब अधिकारी सीधे दस्तावेजों और 6 महीने की समय-सीमा के आधार पर किसी भी फर्जी नाम को वोटर लिस्ट से बाहर का रास्ता दिखा सकेंगे। सरकार के इस कदम से त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की पारदर्शिता और निष्पक्षता और अधिक मजबूत होगी।

