UPI Payment Rule 2026: ₹2,000 से ऊपर के पेमेंट पर नया चार्ज
1:04 PM, Sep 16, 2026
R Express भारत
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अगर आप भी अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए फोन पे, गूगल पे या पेटीएम जैसी यूपीआई ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है।

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उत्तर प्रदेश।अगर आप भी अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए फोन पे, गूगल पे या पेटीएम जैसी यूपीआई ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। डिजिटल पेमेंट को लेकर एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है, जिसके तहत ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा ऑनलाइन पेमेंट पर 0.4% शुल्क लिया जाएगा। यह नया नियम 15 अक्टूबर 2026 से पूरे देश में लागू हो जाएगा। हालांकि, आम जनता और छोटे रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदारों के लिए एक बहुत अच्छी राहत की खबर भी है।
आम ग्राहकों को क्या फायदा और क्या नुकसान?
इस नए नियम को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें चल रही हैं, लेकिन आपको घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।अगर आप एक सामान्य यूजर हैं और किसी दुकान पर जाकर सामान खरीदते हैं, तो आपके लिए यूपीआई पहले की तरह ही बिल्कुल मुफ्त रहेगा। आपकी जेब से एक भी एक्स्ट्रा रुपया नहीं कटेगा।दि आप अपने किसी दोस्त या परिवार के सदस्य के खाते में पैसे भेजते हैं (P2P), तो चाहे वह रकम ₹2,000 से कम हो या ज्यादा, उस पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।
दुकानदारों और बिजनेस पर कैसा होगा असर?
यह नया नियम केवल कमर्शियल यानी मर्चेंट ट्रांजैक्शंस पर ही लागू होगा। इसमें भी छोटे और बड़े व्यापारियों के बीच अंतर रखा गया है।जब कोई ग्राहक किसी बड़े शोरूम, मॉल, होटल या बड़े मर्चेंट आउटलेट पर ₹2,000 से ज्यादा का डिजिटल भुगतान करेगा, तब उस व्यापारी को 0.4% का शुल्क देना होगा।गली-मोहल्ले के छोटे किराना स्टोर, सब्जी वाले या चाय की दुकान चलाने वाले छोटे व्यापारियों को इस दायरे से बाहर रखा गया है। उन पर जीरो-चार्ज की पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी।
समझिए कितना कटेगा चार्ज और क्या है लिमिट?
व्यापारियों को राहत देने के लिए इस शुल्क की एक अधिकतम सीमा (कैपिंग) भी तय की गई है, ताकि बड़े लेन-देन पर बहुत ज्यादा बोझ न पड़े।किसी भी एक ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट से अधिकतम ₹300 ही लिए जा सकते हैं।अगर कोई ग्राहक दुकान पर ₹5,000 का पेमेंट करता है, तो मर्चेंट के खाते से ₹20 कटेंगे। वहीं, अगर कोई ₹1 लाख या उससे बड़ा पेमेंट करता है, तो प्रतिशत के हिसाब से ₹400 नहीं, बल्कि फिक्स ₹300 ही कटेंगे।
आखिर क्यों लिया गया यह फैसला?
आंकड़ों के मुताबिक, देश में होने वाले लगभग 96% यूपीआई ट्रांजैक्शन ₹2,000 से कम के ही होते हैं। इसका मतलब यह है कि इस नए नियम का असर केवल 4% बड़े लेन-देन पर ही पड़ेगा। इस व्यवस्था से जो पैसा इकट्ठा होगा, उसका इस्तेमाल ऑनलाइन फ्रॉड को रोकने, पेमेंट सिस्टम को और सुरक्षित बनाने तथा ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट बैंकिंग को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।

