LU में फीस वृद्धि का बवाल: 11 दिनों से धरने पर बैठे छात्रों के समर्थन में उतरे पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप, निलंबन वापसी की मांग
7:03 PM, Jun 12, 2026
R Express भारत
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लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब थमता नजर नहीं आ रहा है। कैंपस में फीस वृद्धि के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों पर हुई प्रशासनिक

लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब थमता नजर नहीं आ रहा है। कैंपस में फीस वृद्धि के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई के बाद से माहौल काफी गरमा गया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा कुछ छात्रों को बाहर का रास्ता दिखाए जाने के विरोध में पिछले 11 दिनों से छात्र कैंपस परिसर में ही धरने पर बैठे हैं। आंदोलन पर बैठे छात्र प्रेम प्रकाश यादव, आशीष शुक्ला और प्रिंस प्रकाश का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और उनका निलंबन वापस नहीं लिया जाता, तब तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
इसी बीच, इस छात्र आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और सूबे के पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद कुमार सिंह गोप ने धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारी छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने छात्रों से पूरी घटना की जानकारी ली और उनके इस संघर्ष को अपना पूरा समर्थन देने का ऐलान किया। पूर्व मंत्री के अचानक कैंपस पहुंचने और छात्रों के बीच बैठने से यूनिवर्सिटी प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं।
हक की आवाज उठाना गुनाह नहीं: अरविंद सिंह गोप
धरना स्थल पर मौजूद छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद कुमार सिंह गोप ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के इस कड़े रुख की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि पढ़ाई-लिखाई महंगी होने के खिलाफ आवाज उठाना और अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखना हर छात्र का बुनियादी अधिकार है। इसके लिए छात्रों को सीधे यूनिवर्सिटी से बाहर निकाल देना पूरी तरह से तानाशाही रवैया है। इस तरह की एकतरफा कार्रवाई से इन युवाओं के करियर और भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
सपा नेता ने जोर देकर कहा कि, उनकी पार्टी हमेशा से यह मानती आई है कि पढ़ाई और अच्छी शिक्षा पाना हर नौजवान का हक है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हमेशा युवाओं और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए काम किया है। उन्होंने कैंपस के जिम्मेदार अधिकारियों से मांग की कि वे इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लें। छात्रों की जायज मांगों पर तुरंत विचार करते हुए सभी निष्कासित छात्रों का निलंबन तत्काल प्रभाव से खत्म किया जाए, ताकि कैंपस का माहौल सामान्य हो सके और ये छात्र बिना किसी डर या मानसिक दबाव के अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू कर सकें।
आर-पार की लड़ाई के मूड में छात्र
यूनिवर्सिटी परिसर से आ रही खबरों के मुताबिक, पिछले करीब डेढ़ हफ्ते से खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठे छात्रों का हौसला बेहद बुलंद है। अरविंद सिंह गोप के धरना स्थल पर पहुंचने से आंदोलनकारी छात्रों को एक नई ताकत मिली है। छात्रों का कहना है कि फीस में बेतहाशा बढ़ोतरी करके आम और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों से शिक्षा का अधिकार छीना जा रहा है। जब उन्होंने इसके खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखनी चाही, तो सुनने के बजाय उन्हें सजा दे दी गई।
कैंपस के अन्य छात्र-छात्राओं में भी इस कार्रवाई को लेकर अंदर ही अंदर काफी नाराजगी है। कई छात्र संगठनों का कहना है कि अगर प्रशासन ने जल्द ही अपना अड़ियल रुख नहीं छोड़ा और निष्कासित साथियों की बहाली नहीं की, तो यह आंदोलन सिर्फ लखनऊ यूनिवर्सिटी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे पूरे प्रदेश के स्तर पर ले जाया जाएगा। फिलहाल, इस पूरे सियासी घटनाक्रम के बाद अब सबकी नजरें यूनिवर्सिटी प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि वे छात्रों से बातचीत का रास्ता चुनते हैं या विवाद को और बढ़ने देते हैं।

