यूएस चुनाव: डेमोक्रेट्स की बड़ी जीत, ट्रंप ने ईरान युद्ध को कोसा
2:54 PM, Nov 6, 2026
R Express भारत
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अमेरिकी राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। हाल ही में संपन्न हुए मध्यावधि चुनावों के जो नतीजे सामने आए हैं, उन्होंने सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों को हिलाक

photo by - ( AI )
अमेरिकी राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। हाल ही में संपन्न हुए मध्यावधि चुनावों के जो नतीजे सामने आए हैं, उन्होंने सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों को हिलाकर रख दिया है। इन चुनावों में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने एकतरफा प्रदर्शन करते हुए संसद के दोनों प्रमुख सदनों—'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' और 'सीनेट'—में भारी बहुमत हासिल कर लिया है। इस ऐतिहासिक उलटफेर के बाद सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी को विपक्ष की बेंच पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
इस करारी शिकस्त के बाद देश के प्रशासनिक प्रमुख डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस हार का मुख्य कारण 'ईरान के साथ जारी जंग' को बताया है। ट्रंप ने कहा कि युद्ध की वजह से पैदा हुए हालातों ने मतदाताओं के फैसले को प्रभावित किया, लेकिन वे अपने फैसले पर अडिग हैं। हार के बावजूद उनके तेवरों में कोई कमी नहीं आई है। ट्रंप ने विपक्ष को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि सदनों में बहुमत खोने के बाद भी उनके पास 'वीटो'की अचूक संवैधानिक शक्ति मौजूद है, जिसका इस्तेमाल वे विपक्ष के किसी भी मनमाने प्रस्ताव को रोकने के लिए करेंगे।
दोनों सदनों में सीटों का नया गणित
राजनीतिक समीक्षकों के अनुसार, इन चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने अप्रत्याशित सफलता हासिल की है। 100 सीटों वाली सीनेट में बहुमत के लिए 51 सीटों की आवश्यकता होती है, जहाँ डेमोक्रेट्स ने 54 सीटों पर कब्ज़ा जमाकर अपना दबदबा कायम कर लिया है। वहीं, रिपब्लिकन पार्टी सिर्फ 44 सीटों पर सिमट गई है। दूसरी ओर, 435 सीटों वाली प्रतिनिधि सभा में भी विपक्ष ने 225 से अधिक सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। इस जीत के साथ ही मिशिगन से अब्दुल अल-सईद देश के पहले मुस्लिम सीनेटर बनकर इतिहास रच चुके हैं।
युद्ध और महंगाई बनी हार की वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कई महीनों से ईरान के साथ चल रहे सैन्य टकराव के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों और रिकॉर्ड तोड़ महंगाई से जनता में भारी असंतोष था, जिसका सीधा असर बैलट बॉक्स पर दिखाई दिया। हालांकि, ट्रंप ने अपनी नीतियों का बचाव करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य था।
आगे की राह और कड़ा मुकाबला
दोनों सदनों पर नियंत्रण मिलने के बाद अब विपक्षी दल बेहद आक्रामक मूड में है। विपक्ष ने आगामी 100 दिनों का एक विशेष एजेंडा तैयार किया है, जिसके तहत युद्ध नीतियों की समीक्षा, महंगाई पर लगाम और प्रशासन के कामकाज की जांच की जाएगी। ऐसे में ट्रंप द्वारा वीटो पावर के इस्तेमाल की धमकी ने आने वाले दिनों में एक बड़े संवैधानिक और राजनीतिक टकराव के संकेत दे दिए हैं।


