Varaha Jayanti: जब धरती बचाने के लिए विष्णु जी ने लिया था वराह अवतार
5:16 PM, Sep 13, 2026
R Express भारत
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देशभर में वराह जयंती का पावन पर्व बेहद धूमधाम से मनाया जा रहा है। सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, सतयुग में आज ही के दिन सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्ण

वराह जयंती की फोटो सौ0 RExpress भारत
उत्तर प्रदेश।देशभर में वराह जयंती का पावन पर्व बेहद धूमधाम से मनाया जा रहा है। सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, सतयुग में आज ही के दिन सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु ने धरती की रक्षा करने के लिए अपना तीसरा अवतार यानी 'वराह रूप' धारण किया था। इस खास मौके पर देश के सभी प्रमुख विष्णु मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है और विशेष पूजा-अर्चना का दौर जारी है।
धार्मिक जानकारों के मुताबिक, हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को वराह जयंती मनाई जाती है। सोशल मीडिया से लेकर हर घर में आज उत्सव का माहौल है। लोग एक-दूसरे को इस बेहद शुभ दिन की बधाइयां दे रहे हैं।
क्यों लिया था श्रीहरि ने वराह अवतार?
पौराणिक कहानियों के अनुसार, सतयुग में हिरण्याक्ष नाम का एक बहुत ही शक्तिशाली और क्रूर राक्षस हुआ करता था। उसने अपनी ताकत के घमंड में आकर पूरी पृथ्वी को चुरा लिया और उसे ले जाकर गहरे समुद्र (रसातल) में छुपा दिया। इससे पूरी सृष्टि पर हाहाकार मच गया और मानव जीवन पर संकट मंडराने लगा।
तब ब्रह्मा जी की नाक से अंगूठे के आकार के एक छोटे से वराह (सूअर) प्रकट हुए, जो देखते ही देखते एक विशाल पर्वत की तरह बड़े हो गए। यही भगवान विष्णु का वराह अवतार था। इसके बाद भगवान वराह समुद्र की गहराइयों में उतरे, जहाँ उनका हिरण्याक्ष के साथ भयंकर युद्ध हुआ। श्रीहरि ने उस पापी राक्षस का वध कर दिया और अपने नुकीले दांतों पर पूरी धरती को उठाकर वापस उसकी जगह पर सुरक्षित स्थापित किया।
पूजा का सबसे उत्तम समय
ज्योतिषियों के अनुसार, वराह जयंती के दिन पूजा करने के लिए दोपहर (मध्याह्न) का समय सबसे बेहतरीन माना जाता है। आज के दिन भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और व्रत रखने का संकल्प लेते हैं। पूजा में भगवान विष्णु की मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाया जाता है और उन्हें पीले फूल, फल, धूप और पंचामृत का भोग लगाया जाता है।
जीवन में क्या है इसका महत्व?
वराह जयंती का यह त्योहार हमें यह सीख देता है कि बुराई चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अंत में जीत हमेशा सच्चाई और धर्म की ही होती है। इसके साथ ही यह पर्व हमें अपनी धरती और प्रकृति का सम्मान करने की भी प्रेरणा देता है। मान्यताओं के अनुसार, जो भी व्यक्ति आज के दिन सच्चे मन से भगवान वराह की उपासना करता है, उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और उसे सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

